नागौर में चुनावी संग्राम: 7 पंचायत समितियों में कड़ा मुकाबला, 3 सरपंच निर्विरोध; किसके सिर सजेगा ताज?

नागौर जिले की 7 पंचायत समितियों में सरपंच चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं, जहां 3 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके हैं जबकि 561 प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद अब शेष सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में हैं.

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राजस्थान के नागौर
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राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस समय स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है. इसी कड़ी में नागौर जिले की 7 पंचायत समितियों में चुनावी मुकाबला बेहद रोमांचक और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. नामांकन प्रक्रिया और नाम वापसी का दौर समाप्त होने के बाद अब मैदान पूरी तरह से साफ हो चुका है और तस्वीर सामने आ गई है.

अमरपुरा गांव सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से लगातार मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक, मतदाताओं में अपने मताधिकार के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है. मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही हैं, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता की गहरी दिलचस्पी को बयां करती हैं. ग्रामीण इस बार अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल बुनियादी और जमीनी मुद्दों को केंद्र में रखकर कर रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य रूप से पक्की सड़कें, निर्बाध बिजली आपूर्ति, पेयजल संकट का समाधान और गांवों में साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं मुख्य मुद्दा बनी हुई हैं. जनता ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनना चाहती है जो उनके क्षेत्र का तेजी से और पारदर्शी विकास कर सकें.

 कुल 3 सरपंचों को निर्विरोध चुन लिया गया

नागौर जिले में इस बार चुनाव की एक खास विशेषता यह देखने को मिली है कि कुल 3 सरपंचों को निर्विरोध चुन लिया गया है, जिससे उन गांवों में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. हालांकि, शेष अन्य सीटों पर मैदान में डटे हुए प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर और कड़ी जंग देखने को मिल रही है. निर्वाचन क्षेत्र से नाम वापसी के बाद कुल 561 प्रत्याशियों ने मैदान छोड़ दिया था, जिसके बाद अब कुल 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे हुए हैं और अपनी-अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं.

चुनावी समर में उतरे ये उम्मीदवार घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं और मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने वादों का पिटारा खोल रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, जागरूक मतदाता इस बार पूरी तरह से सतर्क नजर आ रहे हैं. जनता का मुख्य ध्यान अब विकास कार्यों की प्रगति, पिछले कार्यकाल के मूल्यांकन और प्रत्याशियों की साख पर टिका हुआ है. गांव की चौपालों से लेकर चाय की थड़ियों तक हर जगह बस इसी बात की चर्चा है कि इस बार चुनाव में बाजी कौन मारेगा. फिलहाल सभी की निगाहें और सांसें चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं, और हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर इस बार नागौर के इन ग्रामीण इलाकों में किसके सिर सजेगा सरपंच का ताज.

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