विदेश में जिंदगी की जंग, कुवैत में वेंटिलेटर पर नागौर का 'लाल', रो-रोकर मदद मांग रहे बेबस पिता!
नागौर के चूबा गांव का युवक तंवर सिंह कुवैत में एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गया है और फिलहाल वहां के अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है. उसके गरीब और बेबस पिता ने सरकार से आर्थिक मदद, कुवैत जाने के इंतजाम और भारतीय दूतावास के जरिए बेटे के सही इलाज की गुहार लगाई है.
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दो वक्त की रोटी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गए नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र के चूबा गांव निवासी तंवर सिंह चौहान. आज कुवैत में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने को मजबूर हैं. करीब 20 महीने पहले कुवैत कमाने गए तंवर सिंह के साथ 15 अक्टूबर को एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसके बाद से वह कुवैत के फरवानिया अस्पताल के वेंटिलेटर पर भर्ती हैं. हादसे के बाद से उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है.
एक हफ्ते से कोमा जैसी स्थिति में हैं तंवर सिंह
परिजनों के अनुसार, सड़क हादसे में तंवर सिंह को अंदरूनी और बाहरी गंभीर चोटें आई हैं. घटना को एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी उनके शरीर या मस्तिष्क में कोई हलचल (Movement) नहीं हो रही है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनकी हालत बेहद नाजुक है और फिलहाल यह कह पाना मुश्किल है कि वह इस गंभीर संकट से बाहर आ पाएंगे या नहीं.
बेबस पिता की मार्मिक पुकार
तंवर सिंह के बुजुर्ग पिता भंवर सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले भंवर सिंह अपने जवान बेटे की सलामती के लिए लगातार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं. उनका कहना है कि कुवैत के अस्पताल में इलाज का भारी-भरकम खर्च उठा पाना उनके लिए नामुमकिन है.
पीड़ित परिवार ने प्रशासन और सरकार के सामने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- आर्थिक मदद: कुवैत के अस्पताल में वेंटिलेटर पर चल रहे इलाज का खर्च उठाने के लिए परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए.
- कुवैत जाने की व्यवस्था: पिता भंवर सिंह को कुवैत भेजने का इंतजाम किया जाए ताकि वह अपने घायल बेटे से मिल सकें.
- भारतीय दूतावास से संपर्क: कुवैत स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy) के जरिए तंवर सिंह के स्वास्थ्य की नियमित जानकारी परिवार तक पहुंचाई जाए.
गांव चूबा में तंवर सिंह की सलामती और जल्द स्वस्थ होने के लिए लगातार दुआओं का दौर जारी है. परिवार और स्थानीय लोग अब केंद्र और राजस्थान सरकार से मदद की आस लगाए बैठे हैं ताकि इस बेसहारा परिवार के जवान बेटे की जान बचाई जा सके.
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