Rajasthan Panchayat Chunav: 'नेता बोले विकास करेंगे, जनता बोली पहले काम करवाओ!', सरपंच चुनाव को लेकर क्या है ग्रामीण जनता का मूड?
Rajasthan Panchayat Chunav: राजस्थान के पाली जिले के गुंदोज गांव में सरपंच चुनाव को लेकर ग्रामीणों का मूड क्या है? ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि गांव के लोग सड़क, पेयजल, साफ-सफाई, जल निकासी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं से परेशान हैं. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव में इस बार सिर्फ विकास के वादे करने वाले नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके दिखाने वाले प्रत्याशी को ही वोट मिलेगा.
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राजस्थान में पंचायत चुनावों की सरगर्मी के बीच ग्रामीण इलाकों में सियासी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है.जहां एक तरफ जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव राजनीतिक दलों के लिहाज से अहम होते हैं, वहीं आम ग्रामीण जनता का सीधा जुड़ाव और प्राथमिकता हमेशा सरपंच और वार्ड पंच के चुनावों से जुड़ी होती है. पाली जिले के गुंदोज गांव से ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि ग्रामीण विकास, पानी, साफ-सफाई और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए जनता सीधे तौर पर अपने गांव के सरपंच को ही मुख्य मानती है.
बुनियादी समस्याओं से जूझते ग्रामीण और युवाओं की उम्मीदें
गुंदोज गांव में चुनाव मैदान में उतरे युवा और नए प्रत्याशी बेहतर सड़कें, स्ट्रीट लाइट, नालियों की पक्की व्यवस्था और शिक्षा के स्तर को सुधारने के वादे कर रहे हैं. हालांकि, दूसरी तरफ धरातल पर स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण नजर आती है. ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के इतने साल बाद भी उनके गांव में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है.:
पेयजल और जल निकासी: गांव में पानी की सही निकासी न होने के कारण हर गली में गंदगी और जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है. इसके साथ ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है.
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं: गांव में स्कूल और पशु चिकित्सालय तो मौजूद हैं, लेकिन या तो वहां पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं या फिर डॉक्टर तैनात न होने के कारण लोग बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं.
परिवहन की समस्या: ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज बसों के तय समय पर न आने और चालकों की मनमानी के कारण आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
जनता का दो टूक संदेश: 'सिर्फ वादे नहीं, जमीन पर काम चाहिए'
ग्रामीणों ने कैमरे पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव के समय नेता विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद आम जनता की सुधि नहीं लेते. जनता का साफ कहना है कि इस बार वोट उसी प्रत्याशी को दिया जाएगा जो कागजी वादों के बजाय धरातल पर पानी, सफाई, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान कर सके.
