राजस्थान पेपर लीक: एक परीक्षा और 500 करोड़ का खेल! क्या पैसे के दम पर बिक रही हैं सरकारी नौकरियां?
Rajasthan paper leak case: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा पेपर लीक और भ्रष्टाचार का आरोप सामने आया है. एक परीक्षा के जरिए करीब 500 करोड़ रुपये के अवैध खेल का दावा किया जा रहा है, जिसमें नेता, अफसर, पेपर माफिया और कोचिंग माफिया तक की मिलीभगत बताई जा रही है. कर्मचारी चयन बोर्ड अध्यक्ष के बयान ने भी विवाद बढ़ा दिया है. जानिए पूरा मामला.

राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का एक और बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है. एक भर्ती परीक्षा और उसके पीछे करीब 500 करोड़ रुपये के काले साम्राज्य का दावा किया जा रहा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन गंभीर आरोपों पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष की अनिश्चित टिप्पणी ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
भर्ती परीक्षा या 500 करोड़ का भ्रष्टाचार?
सोशल एक्टिविस्ट द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, राजस्थान में एक बड़ी भर्ती परीक्षा आयोजित होने पर करीब 500 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार खड़ा हो जाता है. इसमें से 100 करोड़ रुपये कथित तौर पर सत्ताधारी नेताओं, 50 करोड़ आरपीएससी (RPSC) और कर्मचारी चयन बोर्ड के अधिकारियों, और करीब 25-30 करोड़ पेपर माफिया के पास पहुंचते हैं. बाकी की रकम कोचिंग माफिया और बिचौलियों में बंट जाती है. जब इन आरोपों पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा- 'शायद ऐसा होता होगा' उनके इस 'शायद' शब्द ने लाखों मेहनती छात्रों के भरोसे को हिला कर रख दिया है.
दागी कंपनी को दिया गया करोड़ों का ठेका
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) अब उस काले गठजोड़ की जांच कर रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश की एक दागी कंपनी को राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं का जिम्मा सौंपा गया था. जांच में पता चला है कि साल 2019 में राघव लिमिटेड नाम की फर्म को सुपरवाइजर, प्रयोगशाला सहायक और कृषि पर्यवेक्षक परीक्षाओं की ओएमआर (OMR) शीट स्कैनिंग का ठेका दिया गया. आरोप है कि इस कंपनी ने फोटो एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर स्कैन की गई आंसर शीट्स में हेरफेर की और अपने चहेते उम्मीदवारों के नंबर बढ़ा दिए.
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यूपी में घोटाले के बावजूद राजस्थान में मिला काम
हैरान करने वाली बात यह है कि जिस समय इस कंपनी को राजस्थान में ठेका दिया गया, उस समय यह उत्तर प्रदेश में भी भर्ती घोटाले के कारण जांच के घेरे में थी. यूपी में तो कंपनी के एक अधिकारी की पत्नी के गलत तरीके से चयन का मामला तक सामने आ चुका था. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को इस कंपनी के दागदार इतिहास की जानकारी नहीं थी या फिर अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद ली थीं?
युवाओं के सपनों के साथ छलावा
सरकारी नौकरी राजस्थान के एक मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार के लिए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि पूरी उम्मीद होती है. जब सिस्टम के शीर्ष पर बैठे लोग ही अनिश्चित हों और जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के ऐसे गहरे जाल का खुलासा करें, तो मेहनत करने वाले ईमानदार छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं. आज सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक सिस्टम की विश्वसनीयता पर खड़ा हो गया है. राजस्थान के इस परीक्षा घोटाले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पेपर माफिया और सिस्टम के भीतर बैठे 'विभीषणों' का गठजोड़ कितना मजबूत है.
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