कुर्सी गई पर क्रेज वही! विधानसभा में जब वसुंधरा राजे से टकराए रविंद्र भाटी, तो गलियारों में होने लगी इस नए 'रिश्ते' की चर्चा
Vasundhara Raje Assembly Visit: राजस्थान विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी ने एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी. निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी से मुलाकात और ‘Nice Watch’ वाले पल ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा छेड़ दी. क्या यह महज शिष्टाचार था या भविष्य की सियासी रणनीति? जानें पूरा राजनीतिक विश्लेषण.

राजस्थान की राजनीति में पद भले ही बदल जाए, लेकिन कुछ चेहरों का प्रभाव कभी कम नहीं होता. इसका ताजा उदाहरण राजस्थान विधानसभा में देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सदन पहुंचीं. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर न होने के बावजूद राजे की मौजूदगी ने गलियारों में ऐसी हलचल पैदा की कि सत्ता और विपक्ष, दोनों की निगाहें उन पर टिक गईं. आइए विस्तार से जानते है इस पूरे मामले की कहानी.
रविंद्र भाटी की घड़ी और 'नाइस वॉच' वाला पल
विधानसभा के गेट पर जब वसुंधरा राजे का सामना शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी से हुआ, तो नजारा देखने लायक था. राजे ने बेहद आत्मीयता से भाटी का हाथ पकड़ा और उनकी घड़ी की तारीफ करते हुए कहा- 'नाइस वॉच' (Nice Watch). राजे ने न केवल भाटी की घड़ी, बल्कि उनके ड्रेसिंग सेंस की भी सराहना की. इतना ही नहीं, वह भाटी का हाथ पकड़कर काफी दूर तक साथ चलती नजर आईं, जो सदन के भीतर चर्चा का विषय बन गया.
नौशम चौधरी के अंदाज की भी हुई तारीफ
सिर्फ भाटी ही नहीं, बीजेपी की युवा विधायक नौशम चौधरी के ड्रेसिंग सेंस और पहनावे की भी वसुंधरा राजे ने जमकर तारीफ की. युवा चेहरों को इस तरह सार्वजनिक मंच पर महत्व देना और उनसे सहजता से मिलना यह दर्शाता है कि राजे आज भी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर विधायकों के बीच कितनी लोकप्रिय हैं.
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महज शिष्टाचार या भविष्य की सियासी रणनीति?
राजनीति के जानकारों का मानना है कि राजे का यह अंदाज महज शिष्टाचार नहीं बल्कि एक सोची-समझी 'सॉफ्ट पावर' का प्रदर्शन है. जब कोई बड़ा नेता निर्दलीय और युवा विधायकों के साथ इस तरह आत्मीयता दिखाता है, तो वह एक बड़ा संदेश देता है कि राज्य की राजनीति के समीकरणों में वह आज भी केंद्र बिंदु हैं. कुर्सी जाने के बाद अक्सर भीड़ छंटने लगती है, लेकिन राजे के साथ विधायक आज भी उसी गर्मजोशी से जुड़ते दिख रहे हैं.
धमक अभी भी बरकरार
विधानसभा के इस छोटे से दृश्य ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को एक बड़ा संदेश दिया है. भले ही राजस्थान की सत्ता की कमान आज किसी और के हाथ में हो, लेकिन अनुभव, संगठन पर पकड़ और विधायकों के साथ व्यक्तिगत रिश्तों के मामले में वसुंधरा राजे की धमक आज भी कायम है.
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