क्या भरतपुर महाराजा विश्वेंद्र सिंह थामेंगे BJP का दामन? फेसबुक पोस्ट से कांग्रेस को कहा अलविदा, जानिए राजस्थान में सियासी हलचल का पूरा सच

पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने फेसबुक पर 'अलविदा' लिखकर कांग्रेस छोड़ने के संकेत दिए हैं, जिससे भरतपुर और राजस्थान की राजनीति में भारी सियासी हलचल मच गई है.

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विश्वेंद्र सिंह
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राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. भरतपुर के पूर्व महाराजा और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. विश्वेंद्र सिंह ने अपने आधिकारिक Facebook पेज पर 1993 की बॉलीवुड फिल्म दलाल का प्रसिद्ध गाना "ठहरे हुए पानी में कंकड़ न मार सांवरी..." शेयर करते हुए कांग्रेस पार्टी को 'अलविदा' लिख दिया है.

PCC चीफ डोटासरा और जिला अध्यक्षों से तल्खी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वेंद्र सिंह काफी समय से अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा, भरतपुर और डीग जिले के कांग्रेस जिला अध्यक्षों की कार्यशैली से नाराज चल रहे थे. हाल ही में हुए निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद उन्होंने पार्टी की रणनीति और नीतियों पर सवाल खड़े किए थे. विश्वेंद्र सिंह का आरोप था कि स्थानीय संगठन की गलत नीतियों के कारण भरतपुर क्षेत्र में कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

'अलविदा' कहा, लेकिन लिखित इस्तीफा नहीं

भले ही विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उन्होंने अभी तक पार्टी को औपचारिक रूप से अपना लिखित इस्तीफा नहीं भेजा है. उनसे हुई बातचीत के मुताबिक, उन्होंने रीति-नीति से असहमति जताते हुए पार्टी को अलविदा जरूर कहा है, लेकिन लिखित इस्तीफा देने या न देने को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा है.

दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस आलाकमान ने गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ दिए गए उनके बयानों और पार्टी लाइन से हटकर की गई टिप्पणी की रिपोर्ट दिल्ली हाईकमान को भेज दी है.

क्या BJP में होगी वापसी?

विश्वेंद्र सिंह के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या वह एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं. गौरतलब है कि विश्वेंद्र सिंह ने 1989 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. वे 2008 तक बीजेपी में रहे, जहां से वे दो बार सांसद और विधायक चुने गए. साल 2008 में उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की थी और अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे.

भरतपुर और जाट राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

आगामी दिनों में राजस्थान में पंचायत चुनाव होने वाले हैं. ऐसे समय में भरतपुर और डीग क्षेत्र के कद्दावर जाट नेता विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस से दूरी बनाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या वरिष्ठ नेता मनाकर उन्हें पार्टी में बनाए रखते हैं.

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