इतनी मेहनत करते हैं.. लेकिन पता नहीं क्यों बार-बार हार जाते हैं.. बीजेपी जीत जाती है.. और राजस्थान का ये 5-5 साल वाला रिवाज टूटटा क्यों नहीं.. ये दर्द छलका है राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम और टोंक के लाल.. सचिन पायलट का। और लगता है पायलट गहलोत सरकार के जाने के बाद अपनी हार के कारण ढूंढने निकले हैं.. टोंक में रात का वक्त था.. लोग कड़कड़ाती ठंड में पायलट के लिए टकटकी लगाए बैठे थे। लेकिन पायलट आए और लोगों से अपने दिल की बात कह ही दी। वही बाद जो पायलट ना जाने कब से दिल में दबाए बैठे थे। सुन लीजिए गहलोत जी और सुना दीजिए कांग्रेस आलाकमान को भी.. जो पायलट कह रहे हैं.. जो पायलट पूछ रहे हैं.. हम हर बार खूब मेहनत करते हैं, लेकिन पता नहीं क्यों हार जाते हैं। और बीजेपी जीत जाती है। सचिन पायलट कांग्रेस की हार का दर्द भी नहीं छिपा पाए और उनका ये दर्द जुबां पर आ ही गया. पायलट ने तो यहां तक कह दिया कि इस बार तो हमें जीत की पूरी उम्मीद थी, लेकिन नतीजा वही हुआ की हम हार गए। बहरहाल पायलट का दर्द तो छलक गया लेकिन लगता है कांग्रेस आलाकमान का दिल अभी तक नहीं पसीजा जो अब तक ना पायलट पर कोई फैसला हो पाया है और ना ही राजस्थान में कांग्रेस के भविष्य का। फिलहाल सचिन पायलट महज टोंक से विधायक हैं.. उनके समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी.. नेता प्रतिपक्ष या एक बार फिर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष.. ये तो आगे देखना होगा कि कांग्रेस इस बार पायलट को कौन सी और कितनी बड़ी जिम्मेदारी देती है.. और अगर आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी से टक्कर लेनी है तो शायद पार्टी के लिए ये जरूरी भी है.. कि पायलट को आगे किया जाए। ऐसा पायलट के चाहने वाले कह रहे हैं। ‘Why is this custom of Rajasthan not broken’? At last Sachin Pilot expressed his feelings! But from whom?