एक तरफ तो रंधावा जी कह रहे हैं कि बड़ी उम्र वाले लोगों को अपने आप ही कुर्सी का मोह त्याग देना चाहिए। तो दूसरी तरफ संगोद वाले विधायक की बात भी कही न कही ठीक ही है, ये सत्ता का मोह है जनाब शराब से भी गहरा नशा होता है इसका। खैर बयानों का क्या है, बयान तो नेता अक्सर दे ही देते हैं। बात तो है कही गई बात को अमलीजामा पहनाने की। अगर सच में राजस्थान कांग्रेस में रंधावा जी की बात अमल में लाई जाए तो 106 विधायकों में से 60 साल से ज्यादा उम्र वाले 45 विधायकों को इस्तीफा देना पड़ेगा। तो वहीं 106 विधायकों में से कांग्रेस के 75 विधायक ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल या उससे ज्यादा है। सिर्फ 31 विधायक ही ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल से कम है। वहीं, अगर बात मंत्रियों की हो तो 30 में से 26 ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 या उससे ज्यादा है। राजस्थान कांग्रेस में 70 साल से ज्यादा के उम्र के 9 मंत्री हैं जबकि 60 साल से ज्यादा के 7 मंत्री है। इसके अलावा 50 साल से ज्यादा के 10 मंत्री हैं। इसके यदि बात विधायकों की बात करें तो राजस्थान कांग्रेस में 4 विधायकों की उम्र 80 साल से ज्यादा है जबकि 70 साल से ज्यादा के 20 विधायक हैं। इसके अलावा 60 से 70 साल के 21 विधायक और 50-60 साल के सबसे ज्यादा 30 विधायक हैं। यदि 40-50 साल के बीच के विधायकों की बात करें तो उनकी संख्या 21 है और 30 से 40 साल के 10 विधायक हैं। जब इस बात का जिक्र हो ही रहा है तो हम आपको पिछले साल उदयपुर में हुए चिंतन शिविर की याद भी दिला देते हैं जिसमें ये संकल्प लिया गया था कि पार्टी में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका दिया जाएगा। सत्ता और संगठन दोनों में 50 साल से कम उम्र के 50 प्रतिशत लोग होंगे। इनमें टिकट और संगठन के पद दोनों शामिल हैं। हालांकि कांग्रेस का ये फॉर्मूला 2024 से लागू होगा। लेकिन जब इस आधार पर हम राजस्थान कांग्रेस को देखते हैं तो हालात कुछ और ही नजर आते हैं। युवा विधायकों की बात करें तो वो ज्यादातर पायलट गुट से ही आते हैं। जबकि गहलोत के ज्यादातर विधायक उम्रदराज ही हैं। देश में जहां-जहां कांग्रेस की सरकार है वहां सीएम उम्रदराज ही हैं। अब रंधावा जी का ये बयान तो सिर्फ बयान ही नजर आ रहा है क्योंकि रंधावा जी खुद ही कह रहे हैं कि आपके जो घर का बड़ा है उसे घर से निकाल थोड़ी देंगे। आपका इसे लेकर क्या कुछ कहना है, कॉमेंट बॉक्स में हमें अपनी राय बता सकते हैं। Will the Pilot faction dominate the Gehlot faction if Randhawa is obeyed?