1 सितंबर से आपकी जेब पर बड़ा असर, CNG, दूध और कारें सहित ये चीजें हो गई हैं महंगी

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कैलेंडर बदला और इसके साथ ही हमारी आपकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई नियम भी बदल गए. 1 सितंबर का सूरज देश के करोड़ों लोगों के लिए महंगाई का नया संदेश लेकर आया है. रसोई की गैस से लेकर सुबह के दूध और नई गाड़ी खरीदने के सपनों तक, सब कुछ अब पहले से ज्यादा भारी पड़ने वाला है. हालांकि, इन झटकों के बीच इंटरनेशनल ट्रेवल करने वालों के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है.
 

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महंगाई का यह वार सिर्फ गाड़ियों की टंकी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे आपकी रसोई के बजट में घुस गया है. मुंबई में घर-घर पाइप से पहुंचने वाली PNG गैस के दाम 1 रुपये प्रति SCM बढ़ा दिए गए हैं, जिसके बाद इसकी नई दर 53 रुपये प्रति SCM हो गई है. इसके पीछे वैश्विक बाजार में बढ़ती लागत को वजह बताया जा रहा है. यही नहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी 9.50 रुपये महंगे हो गए हैं. साथ ही, अगर आपने अब तक अपने घरेलू LPG कनेक्शन की e-KYC नहीं कराई है, तो 31 अगस्त की मियाद बीतने के बाद अब आपको बिना वेरिफिकेशन के सब्सिडी वाले सिलेंडर पाने में पसीने छूट सकते हैं.
 

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सुबह-सुबह नाश्ते की मेज पर भी इस महंगाई की तपिश महसूस होने लगी है. मुंबई के तबेला दूध उत्पादकों ने चारे और रखरखाव का खर्च बढ़ने का हवाला देते हुए दूध की कीमतों में एकमुश्त 9 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है. इसके बाद जो खुला दूध अब तक 93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, उसके लिए आज से 102 रुपये चुकाने होंगे. हालांकि, पैकेट वाले दूध के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे आम परिवारों को थोड़ी राहत जरूर है.
 

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अगर आप इस फेस्टिव सीजन में अपने परिवार के लिए नई गाड़ी घर लाने का प्लान बना रहे थे, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी. टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी दिग्गज ऑटो कंपनियों ने 1 सितंबर से अपनी कारों के दाम बढ़ाने का फैसला लागू कर दिया है. टाटा ने अपनी पैसेंजर गाड़ियों और SUV के मॉडल के हिसाब से 25,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की है, वहीं हुंडई ने भी इस साल तीसरी बार अपनी गाड़ियों की दरें बढ़ाकर ग्राहकों को तगड़ा झटका दिया है.

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तमाम झटकों के बीच, विदेश जाने की तैयारी कर रहे हवाई यात्रियों के लिए एयरपोर्ट से एक बेहद सुकून देने वाली खबर आई है. नागरिक उड्डयन विभाग ने इमिग्रेशन की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान और झंझट-मुक्त बना दिया है. अब भारतीय यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर अपने फिजिकल बोर्डिंग पास पर लाल-नीली मुहर (स्टैम्प) लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यात्री अपने स्मार्टफोन में मौजूद ई-बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से क्लीयरेंस पा सकेंगे.

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सितंबर का यह पहला दिन आम आदमी के लिए खट्टे-मीठे अनुभवों का मिला-जुला पैकेज लेकर आया है. एक तरफ जहां महीने की शुरुआत में ही खर्चों की लंबी लिस्ट ने बजट का गणित बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल होते भारत में इमिग्रेशन जैसी सुविधाओं का आसान होना एक आधुनिक अनुभव की ओर इशारा करता है. अब देखना यह होगा कि आने वाले त्योहारों के मौसम में यह महंगाई लोगों के उत्साह पर कितना असर डालती है.