इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की सजा की निलंबित, चुनाव लड़ने की चर्चा के बीच जानिए उनकी पूरी कहानी
Nandlal Rai case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी नंदलाल राय की सजा पर रोक लगा दी है. अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी के 2027 में चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई है. वहीं दूसरी ओर, मृतक बीजेपी कार्यकर्ता के बेटे ने इस फैसले पर गहरा दुख और सवाल उठाए हैं.
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Nandlal Rai case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की सजा को निलंबित कर दिया है. अदालत का यह आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कोर्ट के इस फैसले के पीछे मुख्य वजह यह बताई गई है कि आरोपी व्यक्ति भविष्य में चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है. इस घटनाक्रम के बाद जहां एक तरफ कानूनी दायरे में अधिकारों की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार इस आदेश से बेहद आहत नजर आ रहा है.
अदालत का फैसला और सजा निलंबन की मुख्य वजह
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के न्यायमूर्तियों द्वारा की गई. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के पुराने दिशा-निर्देशों के अनुसार राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों का अपने मतदाताओं के प्रति विशेष कर्तव्य होता है. अदालत ने माना कि दोष सिद्धि पर रोक न मिलने से किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित होना पड़ सकता है. इसके साथ ही, आम आदमी की आजीविका के अधिकार और चुनाव लड़ने के अधिकार को समान महत्व देते हुए कोर्ट ने अपीलकर्ता की सजा पर रोक लगाने का यह अहम फैसला लिया है ताकि वह अपनी अपील पर अंतिम फैसला आने तक कानूनी प्रक्रिया का सामना कर सके.
प्रमोद निगम हत्याकांड और परिवार का दर्द
यह पूरा मामला साल 2017 का है जब वाराणसी के थाना सिगरा अंतर्गत जवाहरलाल नेहरू मार्केट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता प्रमोद निगम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मृतक के बेटे ने घटना को याद करते हुए बताया कि उनके पिता ने इलाके में स्वच्छता अभियान चलाया था. इसी दौरान एक शराबी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक स्थान पर गंदगी फैलाने का विरोध करने पर यह विवाद शुरू हुआ था. कुछ ही घंटों बाद घर लौट रहे प्रमोद निगम पर घात लगाकर हमला किया गया और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी. पीड़ित बेटे का आरोप है कि इस मामले में अपराधियों को सजा मिलने के बाद इतनी जल्दी उच्च न्यायालय से इस तरह की राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
परिवार की अपील और सरकार से गुहार
मृतक के बेटे ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि एक साधारण रेड़ी-पटरी वाले या आम इंसान की बात सुने बिना यदि इस तरह के मामलों में राहत दी जाएगी तो न्याय से भरोसा उठने लगता है. उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि इस मामले से जुड़े अपराधियों की पृष्ठभूमि और उनके पास आने वाले धन के स्रोतों की गहराई से जांच की जानी चाहिए. पीड़ित परिवार का कहना है कि वे इस पूरे प्रकरण को लेकर न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और आगे भी अपनी बात सरकार तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे.
