अमित शाह के 'अंगद का पैर' वाले बयान पर भड़के शंकराचार्य, बोले- 'सत्ता के अहंकार से नहीं, धर्म और सत्य से टिका था अंगद का पैर'

Amit Shah Angad Statement: अमित शाह के 'अंगद का पैर' वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि अंगद का पैर सत्ता के अहंकार या हठधर्मिता से नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के धर्म, सत्य और न्याय के बल पर टिका था. शंकराचार्य ने योगी सरकार के राम राज्य के दावों, उत्तर प्रदेश में गौवंश की स्थिति और संतों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

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Amit Shah Angad Statement Controversy
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. हाल ही में लखनऊ दौरे के दौरान बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तुलना 'अंगद के पैर' से करते हुए कहा था कि विपक्ष चाहे कुछ भी कर ले, बीजेपी सरकार को सत्ता से कोई नहीं हिला सकता और यह अंगद के पैर की तरह मजबूती से जमी हुई है. इस बयान पर ज्योतिषाचार्य एवं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कड़ी आपत्ति जताई है.

'अंगद का पैर सत्ता के दंभ पर नहीं, धर्म और न्याय पर टिका था'

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अमित शाह के इस राजनीतिक रूपक का खंडन करते हुए कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए धार्मिक प्रतीकों और प्रसंगों का इस तरह इस्तेमाल करना उचित नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रावण की सभा में अंगद द्वारा पैर जमाने के पीछे कोई सत्ता का अहंकार या हठधर्मिता नहीं थी, बल्कि उसके पीछे भगवान श्री राम का धर्म, सत्य और न्याय विद्यमान था. शंकराचार्य ने कहा कि अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी धार्मिक प्रतीक को उठाकर राजनीति के लिए उपयोग कर लेना धर्म का अनादर है.

योगी सरकार की कार्यप्रणाली और गौवंश के मुद्दे पर हमला

अमित शाह के बयान पर असंतोष जताने के साथ-साथ शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर भी तीखे प्रहार किए. उन्होंने सरकार के 'राम राज्य' के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा:

गौवंश की स्थिति: उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह वास्तव में 'धर्म राज्य' होता तो उत्तर प्रदेश में गायों की स्थिति बेहतर होती, जबकि साल 2019 से 2024 के बीच राज्य से लाखों गायों के गायब होने के आंकड़े सामने आए हैं. दीपावली के दिन गौशालाओं में दीये जलाने के आयोजनों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि केवल कैमरे के सामने आभा मंडल (इवेंट) सजाने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती, बल्कि गौशालाओं की हालत दयनीय है.

संतों और जनता पर सख्ती: शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विरोध या आवाज दबाने के लिए संतों और आम जनता पर पुलिस का इस्तेमाल कर रही है तथा गौवंश से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों के घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी जाती है. उन्होंने ऐलान किया कि गौ माता के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर आगामी 22 तारीख को वे लखनऊ कूच करेंगे.

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