ग्रेटर नोएडा: PNB में करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में CBI का एक्शन, महिला कर्मचारी समेत दो गिरफ्तार, तीन साल तक चलता रहा खेल

Greater Noida PNB fraud Case: ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक में ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है. CBI ने बैंक की महिला कर्मचारी दीपांशी और पुणे से आशुतोष पाठक को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल कर तीन साल तक अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए गए.

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ग्रेटर नोएडा: PNB में करोड़ों की धोखाधड़ी के ममाले में CBI का एक्शन
ग्रेटर नोएडा: PNB में करोड़ों की धोखाधड़ी के ममाले में CBI का एक्शन
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Greater Noida PNB fraud Case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में 10.24 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में CBI ने बड़ा एक्शन लिया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में बैंक की एक महिला कर्मचारी और पुणे से एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि पिछले तीन साल से ग्राहकों के खातों से उनकी जानकारी और अनुमति के बिना पैसे निकाले जा रहे थे.

शुरुआती जांच में अब तक कुल 10.24 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पता चला है. जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार महिला कर्मचारी की पहचान दीपांशी के रूप में हुई है. वह ग्रेटर नोएडा के पाई-1 सेक्टर स्थित PNB शाखा में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर तैनात थी. वहीं, दूसरे आरोपी आशुतोष पाठक को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया है.

बता दें कि CBI ने इस मामले में 29 अक्टूबर को FIR दर्ज की थी. एजेंसी का आरोप है कि दीपांशी ने आशुतोष पाठक और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर अलग-अलग ग्राहकों के बैंक खातों से बिना अनुमति कुल 10.24 करोड़ रुपये निकाल लिए.

पूछताछ में रो पड़ी महिला कर्मचारी, बैंक ने किया ये दावा

बैंक की शिकायत के अनुसार, संदिग्ध लेनदेन को लेकर जब ब्रांच हेड ने दीपांशी से पूछताछ की तो वह रोने लगी. बैंक का दावा है कि इस दौरान दीपांशी ने बताया कि ये ट्रांजैक्शन आशुतोष पाठक के कहने पर किए गए थे. वह आशुतोष को पहले से जानती थी. बैंक ने अपनी शिकायत में पूछताछ के दौरान सामने आई इन बातों का जिक्र किया है. CBI ने भी इन्हें अपनी FIR में शामिल किया है. हालांकि, मामले में आरोपों की जांच अभी जारी है.

दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी का किया गया कथित दुरुपयोग

PNB की शिकायत में बैंक के सिस्टम लॉग और यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड की जांच का भी हवाला दिया गया है. शुरुआती जांच के मुताबिक, ग्राहकों के खातों से पैसे निकालने के लिए बैंक के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) सिस्टम में दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि दीपांशी ने अलग-अलग शाखा अधिकारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल कर लंबे समय तक अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए. इस तरह ग्राहकों के खातों से पैसे निकाले जाते रहे और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी.

ऐसे खुला करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला

बैंक की ओर से CBI को दी गई शिकायत के मुताबिक, इस पूरे मामले का खुलासा 16 सितंबर को हुआ. उस दिन एक महिला खाताधारक ने बैंक शाखा प्रमुख से संपर्क कर अपने खाते से हुए तीन संदिग्ध ट्रांजैक्शन की शिकायत की थी. इसके बाद बैंक प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू की. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि सिर्फ एक महिला ग्राहक ही नहीं, बल्कि कई अन्य ग्राहकों के खातों से भी उनकी जानकारी और अनुमति के बिना पैसे निकाले गए थे. बैंक के मुताबिक, अब तक अलग-अलग खातों से 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी सामने आई है. हालांकि, खातों और लेनदेन का मिलान अभी जारी है. ऐसे में धोखाधड़ी की कुल रकम बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

भ्रष्टाचार और IT एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज

CBI ने इस मामले में दीपांशी, आशुतोष पाठक और कुछ अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की है. इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, खातों में हेराफेरी और लोक सेवकों के आपराधिक कदाचार से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं. CBI के प्रवक्ता के मुताबिक, पुणे से गिरफ्तार आशुतोष पाठक को मुंबई लाने के लिए वहां की विशेष CBI अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल की गई है. फिलहाल जांच एजेंसी पूरे मामले की पड़ताल कर रही है. CBI यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित धोखाधड़ी में और कौन-कौन शामिल था और ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम कहां गई.

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