अशोक चक्र से सम्मानित हुए शुभांशु शुक्ला, लखनऊ से स्पेस तक का सफर रहा प्रेरणादायक सफर
गणतंत्र दिवस 2026 पर भारतीय वायुसेना ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है. ये पुस्कार पाने वाले वे भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं. लखनऊ के एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरिक्ष मिशन गगनयान तक पहुंचने वाले शुभांशु की यह यात्रा साहस, समर्पण और अटूट मेहनत की मिसाल है.

Shubhanshu Shukla: गणतंत्र दिवस 2026 का अवसर पर भारतीय वायुसेना के अधिकारी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र देने की मंजूरी दी थी. इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला इतिहास रचते हुए भारत के पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री बन गए, जिन्हें शांतिकाल में मिलने वाला यह सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्रदान किया गया है.
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला ने NDA जाॅइन की है. दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने अपने माता पिता को बताए बिना ही अपने एक दोस्त की मदद से इस परीक्षा के लिए आवेदन कर दिया था. यहीं से उनके उस सफर की शुरुआत हुई.
आसमान के माहिर खिलाड़ी और फाइटर पायलट
साल 2006 में शुभांशु शुक्ला ने एक फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में कदम रखा. उन्होंने सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर और हॉक जैसे खतरनाक और आधुनिक लड़ाकू विमानों पर 2,000 घंटे से भी अधिक समय तक उड़ान भरी. इसके साथ ही अपनी शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाते हुए उन्होंने आईआईएससी बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री भी हासिल की.
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गगनयान मिशन और कड़ी ट्रेनिंग का दौर
शुभांशु को साल 2019 में ISRO ने गगनयान मिशन के लिए चुना था. इसके बाद उन्होंने रूस के मशहूर यूरी गगारिन सेंटर में अंतरिक्ष यात्री की कठिन ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. इतना ही नहीं उन्होंने नासा और इसरो के संयुक्त सत्रों में भी अपनी विशेषज्ञता साबित की. गगनयान प्रोग्राम के लिए चुने गए अंतिम चार उम्मीदवारों में शामिल होकर उन्होंने यह दिखा दिया कि वो अंतरिक्ष की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.










