सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु पा चुके हरीश राणा के पिता 13 साल पहले रक्षाबंधन के दिन वाली कहानी बताकर रो पड़े

सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा के पिता भावुक हो उठे. जानें 13 साल के लंबे संघर्ष और 2013 की उस घटना का जिक्र किया. प्रतिभावान बेटे की प्रतिभा का जिक्र कर वे रो पड़े.

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बेटे हरीश की प्रतिभा का जिक्र की फफक पड़े पिता.
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सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु पा चुके 31 साल के हरीश राणा के पिता मीडिया से बात करते हुए फफककर रो पड़े. परिजनों ने उहें ढांढस बंधाया. अपनी बात कहते-कहते वे अपने प्रतिभाशाली बेटे के अचीवमेंट्स बताने लगे और  साथ ही 20 अगस्त 2013 का जिक्र करने लगे जिस दिन बेटे और परिवार की जिंदगी में एक काला अध्याय जुड़ा और पिछले 13 सालों से परिवार की जिंदगी बदल गई. 

पिता अशोक राणा बोले- मैं बूढ़ा हो चला हूं. मेरी उम्र 63 साल हो गई है. पत्नी की उम्र 60 साल के करीब है. पिछले 13 सालों से बेटे हरीश की सेवा कर रहे हैं. ये मेरे अपने लड़के का मामला नहीं है... इस भारत देश में पता नहीं कितने ऐसे लड़के पड़े रहते हैं. हम चाहते हैं कि सबका भला हो, कल्याण हो. इस जनहित के लिए हमने ये स्टेप लिया. इंडिया में अब ये रूल लागू हुआ है. ये 7 देशों में भी लागू है. 

दुख इस बात कहा है...ये कहते हुए रो पड़े हरीश के पिता 

हरीश के पिता अशोक राणा कहने लगे... दुख इस बात का है...ये कहते हुए रोने लगे. पड़ोसियों और परिजनों ने ढांढस बंधाया. फिर उन्होंने 20 अगस्त 2013 की घटना का जिक्र किया. बोले- 'मेरा बेटा सिविल इंजीयरिंग कर रहा था..चंडीगढ़ यूनिवर्सिट का टॉपर था. दो कॉम्पीटिशन जीत चुका था. तीसरा पंजाब यूनिवर्सिटी में जीतना था. 20 अगस्त 2013 के दिन मंगलवार था. उस दिन रक्षाबंधन का दिन था. बेटे ने मैसेज भी किया था.' 

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खबर आई कि बेटा गिर गया है, हम देर रात पहुंचे- अशोक राणा 

हरीश के पिता ने बताया-  ''उसी दिन खबर आई कि बेटा गिर गया है. हम यहां से निकले और देर रात पहुंचे. चंडीगढ़ पीजीआई के ट्रामा सेंटर में हम रात 3 बजे पहुंचे. बताया गया कि बेटा हॉस्टल गिर गया है. उसके सिर में चोटें थीं. तब प्रकाश सिंह बादल की सरकार थी. चलो जो भी हुआ होगा. ऐसे ही हमारे कर्मों में लिखा था. हमारे कर्म में बच्चे की सेवा लिखा था किया.'' 

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन इलाके स्थित राज एंपायर सोसाइटी में रहने वाले राणा परिवार के पड़ोसियों का भी कहना है कि परिवार पिछले कई सालों से बेहद कठिन दौर से गुजर रहा था. पूरा परिवार दिन-रात हरीश की सेवा में लगा रहता था. हरीश के छोटे भाई और बहन भी उनकी देखभाल में लगातार परिवार का साथ देते रहे. 

सोसाइटी के लोगों के मुताबिक परिवार ने इलाज और देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब सुधार की कोई उम्मीद नहीं बची तो परिवार पूरी तरह टूट चुका था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जहां परिवार बेहद भावुक है, वहीं सोसाइटी के लोग भी इस कठिन घड़ी में राणा परिवार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. 

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