सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु पा चुके गाजियाबाद के हरीश राणा को दिल्ली AIIMS कैसे देगा पैसिव यूथेनेशिया?

Harish Rana case: Harish Rana case: गाजियाबाद के हरीश राणा को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है. एक हादसे के बाद से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में पड़े हरीश 13 साल से कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे. परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट के इस फैसले ने पूरे देश में पैसिव यूथेनेशिया और इच्छा मृत्यु को लेकर नई बहस छेड़ दी है. ऐसे में जानिए आखिर क्या होता है पैसिव यूथेनेशिया.

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Harish Rana case
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Harish Rana Accident Story: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी सम्मानजनक मृत्यु की परमिशन दी है. इसके बाद से ये मामला देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. करीब 13 साल पहले एक हादसे में हरीश के सिर पर इतनी गंभीर चोट आई कि तब से कोमा हैं. परिजन उन्हें फीडिंग ट्यूब के जरिए खाना खिला रहे थे. हर महीने उनके इलाज में करीब 27 हजार रूपये लगे रहे थे. परिवार की आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि पिता ने मकान तक बेच दिया और घर चलाने और बेटे की देखभाल के लिए सैंडविच और स्प्राउट्स तक बेचने लगे. हरीश की हालत में जब सुधार की सारी उम्मीदें खत्म हो गई ताे माता-पिता ने थक हारकर 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया और बेटे के लिए इच्छा मृत्य देने की मांग की है. यहां से अब हरीश को कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया के जारिए मृत्यु की इजाजत दी. ऐसे में चलिए जानते हैं कि क्या होता है पैसिव यूथेनेशिया और उन्हें ये किस हॉस्पिटल में दिया जाएगा...