Lucknow murder: फटे जूतों में महज 5 हजार रुपए से कारोबार शुरू करने वाले मानवेंद्र को बेटा अक्षत मां की मौत का मानता था दोषी

Lucknow murder case: लखनऊ के आशियाना में पैथोलॉजी कारोबारी की हत्या ने हर किसी को झकझोर दिया है. मेहनत से साम्राज्य खड़ा करने वाले पिता की हत्या उनके ही बेटे ने कर दी. पूछताछ में सामने आई नफरत, पारिवारिक तनाव और खौफनाक साजिश की कहानी अब पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना रही है.

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Lucknow drum murder case: लखनऊ के आशियाना इलाके में पैथालॉजी कारोबारी की हत्या के मामले में हर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं. पूछताछ में सामने आया है कि बेटे ने अचानक पिता की हत्या नहीं की बल्कि उसके मन में पिता के प्रति नफरत पहले से ही भर रही थी. किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि रामलीला में रावण और परशुराम का किरदार निभाकर तारीफें लूटने वाला अक्षत प्रताप सिंह एक दिन पिता की ही निर्मम हत्या कर देगा. शव को ठिकाने लगाने के लिए पिता की डेड बॉडी को उसके ही घर में आरी से काटेगा. 

जालौन के रहने वाले मानवेंद्र सिंह का जीवन संघर्ष और उनकी कहानी भी साधारण नहीं है. महज 5000 रुपए से कारोबार शुरू करने वाले मानवेंद्र सिंह फटे जूते और एक ही शर्ट में घर से काम पर निकलते थे. एक ही शर्ट वो हफ्तों पहनते थे क्योंकि उनके पास उतने पैसे नहीं थे कि दो-तीन शर्ट खरीद लें. खुद घर-घर जाकर ब्लड सैंपल इकट्ठा करते थे. धीरे-धीरे मानवेंद्र सिंह की मेहनत रंग लाई और वे 12 पैथोलॉजी के मालिक बन बैठे. मानवेंद्र सिंह का एक वक्त ऐसा था कि दो जून की रोटी भी मुश्किल थी. फिर एक वक्त ऐसा आया कि पैथोलॉजी के कारोबार में बोरियों में पैसे आने लगे.

पत्नी ने किया सुसाइड, लाइफ में आया टर्निंग प्वाइंट

मानवेंद्र सिंह की लाइफ में टर्निंग प्वाइंट तब आया जब उनकी पत्नी ने सुसाइड कर लिया. पत्नी के मायके वाले इसके लिए मानवेंद्र को दोषी मानते थे. कहीं न कहीं ये बात बेटे अक्षत के मन में भी गहरी बैठने लगी. मां से बेहद प्यार करने वाला अक्षत अब कहीं न कहीं पिता से नफरत करने लगा.

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शराब का ठेका लेकर मानवेंद्र बिजी रहने लगे

इधर मानवेंद्र ने एल्डिको वाले घर को छोड़कर आशियाना इलाके में अपना मकान खरीदा और बेटे-बेटी के साथ यहीं रहने लगे. एक साल पहले शराब का ठेका ले लिया और काफी बिजी हो गए. बच्चों को कम समय दे पाते थे. पिता चाहते थे कि बेटा पैथोलॉजी का कारोबार संभाले पर बेटे अक्षत पर तो होटल व्यवसाय चलाने का जुनूंन था. यहीं पिता और बेटा की बन नहीं पाती थी.

दोस्त ने बताया- पिता के प्रति कड़वाहट पुरानी थी

अक्षत के दोस्त अंशुमान दुबे ने बताया कि पिता के प्रति उसकी कड़वाहट पुरानी थी. वो मां की मौत का जिम्मेदार पिता को मानता ही था. इस कड़वाहट का नतीजा ये होगा ये किसी ने सोचा भी नहीं था. 25 फरवरी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद अक्षत को पूरी रात नींद नहीं आई. वो करवटें बदलता रहा और बड़बड़ाता रहा. फिलहाल पुलिस परिवार के सदस्यों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है. मानवेंद्र और अक्षत किन-किन लोगों से संपर्क में थे, हत्या के बाद आरोपी ने किससे बात की इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है.

क्या है ये पूरा मामला? यहां जानिए 

गौरतलब है कि 20 फरवरी को लखनऊ के आशियाना इलाके के एक मकान में तड़के 4:30 बजे पिता और बेटे के बीच बहस हो गई थी. इस दौरान बेटे अक्षत ने अपने पिता की लाइसेंसी पिस्टल से उन्हें ही गोली मार थी.  इसके बाद आरोपी बेटा पिता के शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर ग्राउंड फ्लोर पर ले आया था. इस दौरान फर्स्ट फ्लोर पर चाचा-चाची बच्चों के साथ सो रहे थे. आरोपी इसके बाद आरोपी ने शव को नीले ड्रम में भरने की कोशिश की, जब शव ड्रम में नहीं फिट हो पाया तो उसे आरी और चाकू से काटकर टुकड़े किए गए है. इसके बाद आरोपी ने पिता के सिर और बॉडी के अलग-अलग पार्ट शहर के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया. इस दौरान बेटे ने पिता की ब्रेजा कार का इस्तेमाल किया, जिसपर पुलिस का स्टिकर लगा हुआ था. गाड़ी में पैथोलॉजी के पेपर भी पड़े हुए थे. वही बेटे ने बाकी के कटे अंगों को नीले ड्रम भरकर एक कमरे में रख दिया.

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