'एक खामेनेई मरेगा, हजार ऊपर हैं'... ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लखनऊ में गम का माहौल, महिला ने सड़क पर फूट-फूटकर रोते हुए कही ये सब बातें

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिकी-इजराइली हमले में मौत के बाद लखनऊ के पुराने इलाकों में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. सड़कों पर उमड़े जनसैलाब के बीच महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है. शहर में तीन दिनों के शोक की घोषणा के साथ इमामबाड़े और बाजार पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं

Ayatollah Khamenei Death Protest Lucknow
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Ayatollah Khamenei Death Protest Lucknow: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की एक अमेरिकी-इजराइली संयुक्त हमले में मौत हो गई है. इसकी जानकारी मिलने के बाद से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस दौरान महिलाएं रोते हुए खामेनेई को अपना 'शेर' और 'रहबर' कहते हुए नजर आए. 

प्रदर्शन के दौरान एक महिला ने रोते हुए कहा, "मेरा शेर था, कल भी शेर था, आज भी शेर है और कयामत तक शेर रहेगा. एक खामेनेई मरेगा तो हजार खामेनेई पैदा होंगे." महिलाओं के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खामेनेई को इजराइल और अमेरिका ने धोखे से मारा है.

लखनऊ में तीन दिनों का शोक

खामेनेई की मौत के बाद लखनऊ के शिया समुदाय ने तीन दिनों के आधिकारिक शोक की घोषणा की है. इसके चलते लखनऊ का ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा और बड़ा इमामबाड़ा पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. पुराने लखनऊ के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है और व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं. प्रदर्शनकारियों ने छोटे इमामबाड़े से बड़े इमामबाड़े तक एक विशाल मार्च निकाला, जिसमें बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सभी शामिल हुए.

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अमेरिका-इजराइल के खिलाफ गुस्सा

सड़कों पर उतरे युवाओं में भी जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला. आजमगढ़ से आए एक प्रदर्शनकारी मोहम्मद सैफ ने कहा, "अमेरिका और इजराइल ने जिस तरह हमारे रहबर को शहीद किया है, हम उसके खिलाफ खड़े होंगे. अमेरिका लगातार जुल्म को बढ़ावा दे रहा है और हम इस जुल्म के खिलाफ अपनी जान की बाजी लगाने को तैयार हैं." लखनऊ की सड़कों पर 'या हुसैन' के नारों के साथ शोक मनाया जा रहा है और माहौल पूरी तरह गमगीन है.

अलर्ट मोड पर प्रशासन 

लखनऊ में हो रहे इस प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है. यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके. फिलहाल, पूरा पुराना लखनऊ काले झंडों और खामेनेई के पोस्टरों से पटा हुआ है और फिजाओं में केवल मातम और विरोध की गूंज है.

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