मेरठ जेल में करवा चौथ पर जेल में बंद मुस्कान और रविता ने मांगी चूड़ियां-बिंदी, जानिए क्या है पूरा मामला

Meerut jail muskan karwa chauth: मेरठ जिला जेल में बंद बहुचर्चित ब्लू ड्रम कांड की आरोपी मुस्कान ने करवा चौथ के अवसर पर चूड़ियों और बिंदी जैसी श्रृंगार सामग्री की मांग की है. सामाजिक संस्था के जरिए सामने आई इस खबर के बाद जेल प्रशासन के नियमों और महिला बंदियों की गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

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मेरठ जेल में बंद मुस्कान ने करवा चौथ पर मांगी चूड़ियां और बिंदी
मेरठ जेल में बंद मुस्कान ने करवा चौथ पर मांगी चूड़ियां और बिंदी
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Meerut jail muskan karwa chauth: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला जेल से करवा चौथ के पावन अवसर पर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. बहुचर्चित मामलों में जेल की सलाखों के पीछे बंद महिला बंदी मुस्कान और रविता ने करवा चौथ के खास मौके पर चूड़ियों और बिंदी की मांग की है. हालांकि दोनों ने श्रृंगार का सामान तो मंगवा लिया है, लेकिन वह इस साल करवा चौथ का व्रत रखेंगी या नहीं, इसको लेकर अभी तक पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है.

जेल में सामाजिक संस्था के जरिए सामने आई मांग

इस पूरे मामले की जानकारी तब सामने आई जब सोमवार को संजीवनी महिला संस्था की एक टीम मेरठ जिला जेल पहुंची. संस्था की तरफ से जेल में बंद महिला बंदियों को करवा चौथ के पावन त्यौहार के लिए पूजा-पाठ का सामान, मिट्टी के करवे, सुहाग के श्रृंगार का सामान और तमाम चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं. इस दौरान जब संस्था की टीम ने महिला बंदियों से उनकी जरूरत के सामान के बारे में पूछा, तो संस्था की सचिव पारुल बंसल ने यह खुलासा किया कि जेल में बंद मुस्कान ने विशेष रूप से चूड़ियों और बिंदी की मांग की है. वहीं दूसरी महिला बंदी रविता ने भी ठीक इसी तरह से श्रृंगार का सामान मांगा है. संस्था की तरफ से उनकी जरूरत के मुताबिक सारा सामान मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन इन दो महिलाओं द्वारा व्रत रखे जाने को लेकर फिलहाल संशय बरकरार है.

जेल प्रशासन के नियम और अधिकारियों का पक्ष

इस पूरे मामले पर जब जेल प्रशासन का पक्ष सामने आया, तो मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉक्टर वीरेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि जेल में बंद कोई भी महिला बंदी अपनी इच्छा से करवा चौथ का व्रत रख सकती है. जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक ऐसी महिलाओं के लिए पूजा-पाठ और व्रत के दौरान फलाहार जैसी व्यवस्थाएं भी पूरी की जाती हैं. यदि किसी महिला बंदी का पति किसी दूसरे शहर में रहता है, तो वह उनकी तस्वीर या किसी निशानी को सामने रखकर विधि-विधान से पूजा संपन्न कर सकती है. हालांकि, तकनीकी पेंच यह भी है कि मुस्कान और रविता कानूनी रूप से अपने उन प्रेमियों के साथ वैवाहिक बंधन में नहीं हैं जिनके साथ उनके मामले जुड़े हैं, इसलिए प्रशासनिक काम नियमों के दायरे में रहकर ही किए जा रहे हैं.

रंग-बिरंगी कंदील बनाना सीख रही हैं मुस्कान

संजीवनी महिला संस्था की सचिव पारुल बंसल ने यह भी जानकारी दी कि जेल में महिलाओं को दीपावली के मद्देनजर कंदील यानी लालटेन बनाना सिखाया जा रहा है. इस ट्रेनिंग के लिए नाम लिखवाने वाली महिला बंदियों में मुस्कान का नाम भी सबसे आगे शामिल है. खास बात यह है कि मुस्कान इससे पहले जेल के अंदर ब्यूटीशियन का कोर्स भी कर चुकी है और उसने जेल में रहकर राखी बनाने का हुनर भी सीखा है. संस्था का उद्देश्य कैदियों को डिप्रेशन के दौर से बाहर निकालकर पॉजिटिव मोड की तरफ लाना है, जिसमें मुस्कान काफी रुचि ले रही है.

सजा-ए-मौत और जघन्य मामलों की पृष्ठभूमि

बता दें कि मुस्कान और रविता अपने प्रेमियों के साथ मिलकर अपने पतियों की अलग-अलग तरीकों से हत्या कर देती हैं और उसके बाद प्रेमी के साथ जिंदगी बिताने के सपने देखती हैं. अदालत की तरफ से इन महिलाओं और इनके प्रेमियों को सजा-ए-मौत मुकर्रर की जा चुकी है. इसके बावजूद जेल के अंदर करवा चौथ और श्रृंगार के सामान की मांग करने को लेकर यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मेरठ से हमारे सहयोगी उस्मान चौधरी ने यह खबर भेजी है.

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