Prayagraj: कसारी-मसारी का नाम बदलकर 'श्री कृष्णपुरी' किए जाने पर क्या बोले स्थानीय? जानिए पूरी रिपोर्ट

Prayagraj News: प्रयागराज के चर्चित इलाके कसारी-मसारी का नाम बदलकर 'श्री कृष्णपुरी' कर दिए जाने पर स्थानीय हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने विकास और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताते हुए इस फैसले का स्वागत किया है.

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कसारी मसारी का नाम बदला गया
कसारी मसारी का नाम बदला गया
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) के चर्चित इलाके कसारी-मसारी का नाम बदलकर 'श्री कृष्णपुरी' कर दिया गया है. इस फैसले के बाद से सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है, जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कभी माफिया अतीक अहमद के खौफ और सियासी वर्चस्व के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके का नाम बदलने पर वहां रहने वाले लोगों ने क्या कहा, आइए जानते हैं.

क्या है कसारी-मसारी का इतिहास?

स्थानीय बुजुर्गों और इतिहास के मुताबिक, 'कसारी' और 'मसारी' दो सगे भाई थे जो सूफी संत और फकीर माने जाते थे. मूल रूप से फैजाबाद (अब अयोध्या) के रहने वाले ये दोनों भाई प्रयागराज में आकर बस गए थे. लोगों की सेवा और सादगी के कारण उनकी अच्छी पहचान बनी थी. उनके निधन के बाद उन्हें इसी क्षेत्र में दफनाया गया, जिसके बाद इस जगह का नाम कसारी-मसारी पड़ा. इसी कब्रिस्तान में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ और उसके पिता को भी दफनाया गया था. 90 के दशक में यह इलाका अतीक अहमद के राजनीतिक प्रभाव और आपराधिक वर्चस्व का गढ़ माना जाता था.

स्थानीय लोगों और मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया

इस नाम परिवर्तन पर इलाके के लोगों की अलग-अलग राय देखने को मिली है. स्थानीय निवासी रियाज अहमद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले की खुलकर तारीफ की है. उनका मानना है कि नाम बदलने से इलाके की पुरानी और नकारात्मक छवि बदलेगी. रियाज अहमद ने यहां तक कहा कि सीएम योगी के कामकाज और इस तरह के फैसलों से प्रभावित होकर आने वाले समय में वे उन्हें देश के प्रधानमंत्री के रूप में भी देख सकते हैं.

वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि नाम से ज्यादा जरूरी गरीब जनता का फायदा होना है. उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा गरीबों के लिए बनाई जा रही आवास कॉलोनी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि अगर नाम बदलने से इलाके को नई पहचान और विकास मिलता है, तो इसका स्वागत होना चाहिए.

हिंदू समुदाय और अन्य नागरिकों का पक्ष

स्थानीय निवासी रघुनाथ त्रिवेदी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि नामकरण बदलते रहते हैं और इसमें कोई हर्ज नहीं है. उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण को पूरी दुनिया में चाहने वाले लोग हैं, इसलिए मोहल्ले का नाम श्री कृष्णपुरी रखा जाना एक अच्छा कदम है. कुछ लोगों का यह भी मानना था कि पुराना नाम उच्चारण में कई बार अलग अर्थों में लिया जाता था, इसलिए इस बदलाव से इलाके की पहचान बेहतर होगी.

माफिया के कब्जे से छूटी जमीन पर बनी है योजना

प्रशासनिक तौर पर इस इलाके की तस्वीर अब बदल रही है. जिस जमीन पर कभी माफिया अतीक अहमद का कथित कब्जा हुआ करता था, उसे मुक्त कराकर यूपी सरकार ने वहाँ गरीबों के लिए फ्लैट्स (कॉलोनी) बनाने का काम शुरू किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस स्थान का भूमि पूजन किया था और कसारी-मसारी का नाम बदलकर श्री कृष्णपुरी करने की घोषणा की थी. अब देखना यह होगा कि इस नई पहचान के साथ-साथ इस क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं और विकास की तस्वीर कितनी तेजी से बदलती है.

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