शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो मामला फर्जी? मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने लगाए रामभद्राचार्य और शासन पर गंभीर आरोप

Prayagraj POCSO case: प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज पॉक्सो मामले में मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने तोड़ी चुप्पी. कैमरे के सामने आए. जानें क्यों इसे स्वामी रामभद्राचार्य और शासन की साजिश बता रहे हैं.

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मुकुंदानंद ब्रह्मचारी भी कैमरे पर आए.
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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ प्रयागराज के झूसी थाने में दर्ज पॉक्सो (POCSO) मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मामले में नामजद आरोपी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने सामने आकर सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे एक बड़ी गहरी साजिश करार दिया है. 

"हिस्ट्रीशीटर के दम पर रची गई साजिश"- मुकुंदानंद ब्रह्मचारी

मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने दावा किया कि शिकायतकर्ता खुद एक हिस्ट्रीशीटर है, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड जगजाहिर है. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को मेरा सही नाम तक नहीं पता, उसने गुरुजी जैसे पवित्र पद पर बैठे महापुरुष पर घृणित आरोप लगाए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बच्चों का जिक्र एफआईआर में है, उनका उनके किसी भी संस्थान या गुरुकुल से कभी कोई संबंध नहीं रहा है. 

रामभद्राचार्य और मुख्यमंत्री पर निशाना 

मुकुंदानंद ने इस पूरे विवाद के पीछे स्वामी रामभद्राचार्य और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर काम होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी गौ-रक्षा और बीफ निर्यात के खिलाफ मुखर हैं, जिससे सत्ताधारी असहज महसूस कर रहे हैं. उनके अनुसार, यह हमला केवल व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सनातन धर्म के 'किले' और गुरुकुल परंपरा को नष्ट करने का एक कुत्सित प्रयास है.

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बच्चों के संरक्षण की मांग 

उन्होंने प्रशासन और डीजीपी से मांग की है कि कथित पीड़ित बच्चों को उस 'हिस्ट्रीशीटर' के चंगुल से छुड़ाकर सरकारी संरक्षण में लिया जाए, ताकि उन पर किसी भी तरह का दबाव या प्रलोभन काम न कर सके. मुकुंदानंद ने कहा कि वे कानूनी रूप से इसका सामना करने के लिए तैयार हैं और उन्होंने न्यायालय में अपना पक्ष रख दिया है. 

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