'10 लाख कहो या 25 लाख, जितनी भीड़ कहोगे खड़ी कर देंगे', गौ रक्षा यात्रा के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सरकार को खुली चुनौती

Swami Avimukteshwaranand Saraswati news: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ रक्षा यात्रा के दौरान सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगों के पीछे जनसमर्थन पर सवाल है तो सरकार संख्या तय कर दे, वे 1 लाख से लेकर 25 लाख तक लोगों की भीड़ खड़ी करने को तैयार हैं. यात्रा के दौरान उन्होंने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग दोहराई और राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा.

Swami Avimukteshwaranand Saraswati
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उत्तर प्रदेश में गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए निकाली जा रही गौ रक्षा यात्रा अपने चौथे दिन में प्रवेश कर चुकी है. तीर्थ स्थल नैमिषारण्य (सीतापुर) पहुंची इस यात्रा के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार और विरोधियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दो टूक कहा कि अगर सरकार को लगता है कि उनकी मांग के पीछे जनसमर्थन नहीं है, तो वे संख्या बता दें- वे लाखों की भीड़ खड़ी करने को तैयार हैं. विस्तार से जानिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या-कुछ कहा है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लगाया बड़ा आरोप

यात्रा के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर पॉक्सो कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर दबाव बनाने का आरोप लगा है. इस पर पलटवार करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जो लोग इस यात्रा का विरोध कर रहे हैं, उनका इतिहास खुद संदिग्ध है. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले एक व्यक्ति पर पहले से ही गौ तस्करी का मुकदमा दर्ज है और वह पुलिस अधिकारी को रिश्वत देते हुए जेल भी जा चुका है. उन्होंने कहा, 'जो व्यक्ति गायों की तस्करी में शामिल रहा हो, वो तो गौ रक्षा के काम को रोकना ही चाहेगा.'

सरकार की नीयत पर सवाल: 'कानून है तो बदलाव क्यों?'

विरोधियों के उस तर्क पर कि 'गौ वध अधिनियम' पहले से मौजूद है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि 1955 के एक्ट में 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार ने संशोधन क्यों किया? इसका मतलब सरकार खुद मानती है कि कानून पर्याप्त नहीं है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सबसे बड़ी पीड़ा यह जताई कि सरकारी कागजों में आज भी गाय को 'पशु' के रूप में दर्ज किया जाता है, जबकि भारतीय संस्कृति और पूर्वजों ने उसे हमेशा 'माता' माना है. उनकी मांग है कि गाय को पशु की श्रेणी से बाहर कर 'राष्ट्रमाता' घोषित किया जाए.

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भीड़ की चुनौती: 'दिन और जगह बताएं सरकार'

लखनऊ में होने वाली बड़ी सभा से पहले जब भीड़ के अनुमान पर सवाल पूछा गया, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार को चुनौती भरे लहजे में कहा, 'अगर सरकार कहती है कि भीड़ नहीं है इसलिए बात नहीं मानेंगे, तो वो हमें संख्या बताएं. वे 1 लाख कहें, 10 लाख कहें या 25 लाख...जितनी संख्या, जो दिन और जो जगह सरकार बताएगी, वहां भारत की जनता गौ माता के लिए खड़ी मिलेगी.' उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई किसी एक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि गौ माता के सम्मान के लिए है.

'पार्टी निरपेक्ष' हैं हम, हर दल से है सवाल

राजनीतिक दलों के समर्थन पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि वे 'पार्टी निरपेक्ष' हैं. उन्होंने कहा, 'पार्टियां कहती हैं कि वे धर्मनिरपेक्ष हैं, हम कहते हैं कि हम पार्टी निरपेक्ष हैं.'यात्रा में सपा, बसपा या कांग्रेस के नेताओं के शामिल होने पर उन्होंने कहा कि वे यहां अपनी पार्टी का प्रचार करने नहीं, बल्कि 'गौ भक्त' के रूप में आ रहे हैं. उन्होंने भाजपा सहित सभी दलों से सीधा सवाल किया कि क्या वे गाय को 'राज्य माता' या 'राष्ट्रमाता' स्वीकार करने के लिए तैयार हैं?

2027 चुनाव और 'धर्म युद्ध' का आगाज

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संकेत दिया कि सनातन धर्म के प्रतीकों का अपमान, गौ रक्षा के वचन को न निभाना और यूजीसी जैसे मुद्दे सनातनी समाज में भारी आक्रोश पैदा कर रहे हैं. उन्होंने इसे विश्वासघात करार दिया. प्रयागराज की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अब तक वे शांति से बैठे थे, लेकिन अब 'धर्म युद्ध' घोषित होने जा रहा है, जिसमें फिर अपना-पराया नहीं देखा जाएगा.

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