6 महीने पहले प्लानिंग, ठेके और रंगदारी विवाद...देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल शूटआउट केस में बड़ा खुलासा, 2 गिरफ्तार लेकिन मुख्य आरोपी फरार

देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. जांच में पुलिस को पता चला है कि विक्रम शर्मा की हत्या प्लानिंग छह महीने ही कर ली गई थी. अब इस मामले में उत्तराखंड पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा है जबकि मुख्य साजिशकर्ता समेत कई अब भी फरार बताए जा रहे हैं.

Dehradun Silver City mall murder case
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Dehradun Silver City mall murder case: देहरादून के डालनवाला क्षेत्र स्थित सिल्वर सिटी मॉल में 13 फरवरी को हुए विक्रम शर्मा हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. वारदात के 10 दिन बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पकड़े गए आरोपियों में से एक नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी का छात्र बताया जा रहा है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी समेत 6 अन्य लोग अभी भी फरार हैं, जिन पर एसएसपी ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है.

6 महीने की रची साजिश 

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि विक्रम शर्मा की हत्या की प्लानिंग  6 महीने पहले कर ली गई थी. आरोपियों ने पहले उसे जमशेदपुर और नोएडा में मारने की योजन बनाई थी लेकिन भारी भीड़ और कड़ी सुरक्षा के कारण उन्होंने प्लान बदल दिया. इसके बाद देहरादून को ठिकाने के तौर पर चुना गया और 13 फरवरी को सिल्वर सिटी मॉल के पास ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर विक्रम को मौत के घाट उतार दिया.

पुलिस को ऐसे मिला सुराग

घटना के बाद पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता चला कि तीन हमलावर मोटरसाइकिल से आए थे. वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने अपनी बाइक सहस्रधारा रोड पर छोड़ दी और वहां से पहले से तैयार स्कूटी और दूसरी बाइक लेकर हरिद्वार की ओर भाग निकले. छोड़ी गई बाइक झारखंड के सुमित साहू के नाम पर थी. इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस की टीम जमशेदपुर पहुंची और राजकुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया. 

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पूछताछ में स्कॉर्पियो वाहन (जेएच–05–एजे–5517) का सुराग मिला. ये गाड़ी यशराज के नाम पर रजिर्स्टड थी. इसके बाद 23 फरवरी को नैनीताल हाईवे से स्कॉर्पियो मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर के कब्जे से बरामद की गई. फिर पूछताछ में पूरे हत्याकांड का खुलासा हुआ. इसमें सामने आया कि आयुषतोष, विशाल, अंकित और अन्य साथियों ने मिलकर विक्रम शर्मा की हत्या की योजना बनाई थी.

मछली ठेके का विवाद और रंगदारी बनी वजह

पूछताछ में पता चला कि हत्या के पीछे व्यापारिक रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई थी. जांच में सामने आया कि आयुषतोष नाम का व्यक्ति यशराज की कंपनी ‘सारिका इंटरप्राइजेज’ में ड्राइवर था. मछली सप्लाई के ठेके को लेकर विक्रम शर्मा और यशराज के बीच पुराना विवाद चल रहा था. इसके अलावा विक्रम शर्मा पर रंगदारी मांगने के भी आरोप थे. इसी विवाद के चलते आयुषतोष, विशाल, अंकित और अन्य साथियों ने मिलकर विक्रम को रास्ते से हटाने का फैसला किया था.

झारखंड का कुख्यात अपराधी था मृतक विक्रम

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मृतक विक्रम शर्मा  झारखंड का एक कुख्यात अपराधी रहा है. उस पर हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी वसूलने जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे. वह हाल ही में जमानत पर बाहर आया था और देहरादून के रायपुर इलाके में रह रहा था. फिलहाल एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि पुलिस की टीमें अन्य राज्यों में दबिश दे रही हैं और जल्द ही फरार आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा.

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