हरक सिंह रावत के रिश्तों पर क्यों मचा बवाल? सोनिया आनंद कौन हैं, दीप्ति क्यों नाराज हैं और 23 साल पुराना जेनी कांड फिर चर्चा में कैसे आया?

उत्तराखंड में हरक सिंह रावत के निजी रिश्तों को लेकर विवाद बढ़ गया है. सोनिया आनंद को उनकी पत्नी बताए जाने पर दीप्ति रावत ने नाराजगी जताई. भावना पांडे ने दोनों की पुरानी जान-पहचान को लेकर दावे किए. भाजपा विधायक दिलीप रावत ने हरक को नसीहत दी. इस बीच 23 साल पुराना जेनी कांड फिर चर्चा में है.

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Congress Leader Harak Singh Rawat
कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के घर ईडी की रेड
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उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. कहानी शुरू हुई थी एक भवन पर कब्जे के आरोप से. लेकिन बात अब हरक सिंह रावत के निजी रिश्तों तक पहुंच गई है. देहरादून के एक व्यक्ति ने सोनिया आनंद को हरक सिंह रावत की पत्नी बता दिया. इस पर हरक की पत्नी दीप्ति रावत नाराज हो गईं. उन्होंने मीडिया के खिलाफ कोर्ट जाने तक की चेतावनी दे दी.

अब इस विवाद में भाजपा विधायक महंत दिलीप रावत और राजनीतिक कार्यकर्ता भावना पांडे भी कूद पड़े हैं. दिलीप रावत ने हरक सिंह को कम बोलने की सलाह दी है. वहीं भावना पांडे ने दावा किया कि दीप्ति रावत और सोनिया आनंद एक-दूसरे को 25 साल से जानती हैं. उन्होंने दोनों के बीच पुराने झगड़े की बात भी कही है.

इतना ही नहीं, इस पूरे विवाद के बीच हरक सिंह रावत का 23 साल पुराना जेनी प्रकरण भी फिर चर्चा में आ गया है. जेनी ने खुद वीडियो जारी कर कहा है कि नेता आज भी उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं. तो आखिर पूरा मामला क्या है? सोनिया आनंद का नाम हरक सिंह रावत के साथ कैसे जुड़ा? दीप्ति रावत क्यों नाराज हुईं? भावना पांडे और दिलीप रावत ने ऐसा क्या कह दिया? और 2003 के जेनी प्रकरण की कहानी क्या है? आइए, शुरुआत से समझते हैं.

पहले समझिए, 2003 का जेनी प्रकरण क्या था?

बात मार्च 2003 की है. उस समय उत्तराखंड में एनडी तिवारी की सरकार थी. हरक सिंह रावत इस सरकार में मंत्री थे. इसी दौरान असम की रहने वाली एक अविवाहित युवती इंद्राणी देवड़ी उर्फ जेनी ने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया. इसके बाद आरोप लगा कि बच्चे के पिता हरक सिंह रावत हैं. इस मामले ने उस समय उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी थी. हरक सिंह रावत को राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा. मामले की सीबीआई जांच भी हुई. अब करीब 23 साल बाद यह पुराना मामला फिर चर्चा में है. इसकी वजह है जेनी का एक नया वीडियो.

23 साल बाद जेनी ने वीडियो जारी कर क्या कहा?

जेनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया है. इसमें उन्होंने कहा कि साल 2003 के मामले को लेकर आज भी उत्तराखंड के नेता उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. जेनी के मुताबिक, नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाने के लिए उनके पुराने मामले को उठाते हैं. लेकिन इतने सालों में किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि उस समय उनके साथ क्या हुआ था. उन्होंने कहा कि उनके बारे में तरह-तरह की बातें की जा रही हैं. उन्हें बदनाम किया जा रहा है. जबकि उनके पास इस पूरे मामले से जुड़े सबूत हैं. जेनी ने दावा किया कि वह जानती हैं कि किसने क्या किया और क्या नहीं किया. वह जल्द ही सबूतों के साथ अपनी बात सामने रखेंगी. इसके लिए उन्होंने थोड़ा वक्त मांगा है. जेनी ने नेताओं से अपील की कि उनके नाम पर एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाना बंद करें.

मुख्यमंत्री धामी की टिप्पणी के बाद फिर उठा जेनी का मुद्दा

जेनी का मामला दोबारा तब चर्चा में आया जब पिछले महीने, 26 अक्टूबर को हल्द्वानी में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस के सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अंकिता मामले में सरकार ने कार्रवाई की और अदालत तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना चुकी है. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि तंदूर कांड और जेनी कांड किसके शासनकाल में हुए थे. धामी के इसी बयान से 23 साल पुराना जेनी प्रकरण दोबारा चर्चा में आ गया  इसके बाद हरक सिंह रावत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बीच भी बयानबाजी हुई. जेनी के बच्चे के डीएनए टेस्ट का मुद्दा भी उठाया गया.

महेंद्र भट्ट बोले: जैनी का बच्चा कौन?

1 नवंबर 2026 को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने मीडिया से बातचीत में जेनी प्रकरण को लेकर हरक सिंह रावत से सवाल किए. उन्होंने कहा कि यह मामला कांग्रेस सरकार के समय का है. जेनी ने बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन बच्चे का पिता कौन था, यह बात अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई? भट्ट ने कहा कि जेनी ने उस समय हरक सिंह रावत का नाम लिया था. बाद में डीएनए रिपोर्ट में हरक का सैंपल मैच नहीं हुआ, लेकिन जेनी उनके घर में रहती थी. इसलिए यह पता चलना चाहिए कि बच्चे का पिता कौन था. भट्ट ने यह भी कहा कि वह आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि मामले के तथ्य सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं.

मुझे सीबीआई ने दी क्लीन चिट: हरक सिंह

28 अक्टूबर को गैरसैंण में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरक सिंह रावत ने मुख्यमंत्री धामी के बयान पर नाराजगी जताई, वह भावुक भी हो गए. उन्होंने मां धारी देवी, बाबा केदारनाथ और अपने दिवंगत पिता की कसम खाते हुए कहा कि उन्होंने जेनी को कभी छुआ तक नहीं. हरक ने कहा कि जब यह मामला सामने आया था, तब उन्होंने खुद सीबीआई जांच की मांग की थी और जांच पूरी होने तक मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है.

सोनिया आनंद का नाम हरक सिंह रावत से कैसे जुड़ा?

इस नए विवाद की शुरुआत देहरादून के रहने वाले 65 वर्षीय दिव्यांग हरिओम सहगल के आरोपों से हुई. हरिओम सहगल ने सोनिया आनंद पर एक भवन पर कब्जा करने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए. लेकिन उन्होंने इस मामले में एक और दावा कर दिया. सहगल ने कहा कि सोनिया आनंद, हरक सिंह रावत की पत्नी हैं. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जब हरक सिंह रावत वन मंत्री थे, तब उन्हें मरवाने की कोशिश की गई थी. बस यहीं से मामला बदल गया. अब बात सिर्फ भवन के विवाद की नहीं रही. हरक सिंह रावत के निजी रिश्तों पर भी सवाल उठने लगे. हालांकि, सोनिया आनंद ने हरिओम सहगल के आरोपों को गलत बताया. उनका कहना है कि जिस भवन को लेकर विवाद हो रहा है, वह पहले से ही लीज पर था. उन्होंने संपत्ति के लिए भुगतान करने का भी दावा किया.

दीप्ति रावत ने जताई नाराजगी

हरिओम सहगल के आरोपों के बाद हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत सामने आईं. उन्होंने वीडियो जारी कर इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई. दीप्ति ने सवाल उठाया कि जब संपत्ति धोखाधड़ी के आरोप किसी दूसरी महिला पर हैं तो उसे हरक सिंह रावत की पत्नी बताकर खबरें क्यों चलाई जा रही हैं? उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला खुद को हरक सिंह रावत की पत्नी बताती है तो उसे अपने दावे के समर्थन में तथ्य सामने रखने चाहिए. दीप्ति ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने से पहले से ही गढ़वाल की जनता उन्हें जानती है. उन्हें अपनी पहचान बताने की जरूरत नहीं है. उन्होंने मीडिया पर भी नाराजगी जताई. दीप्ति का कहना है कि ऐसी खबरों से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक पीड़ा पहुंची है. पत्रकारों को कोई भी खबर चलाने से पहले उसकी सच्चाई जांचनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सोशल मीडिया, अखबारों और टीवी चैनलों पर भ्रामक खबरें चलाई गईं तो वह अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत जाएंगी. यानी दीप्ति ने हरक सिंह रावत की किसी अन्य पत्नी होने के दावे पर सवाल उठाया और उसे साबित करने के लिए तथ्य पेश करने की बात कही.

सोनिया आनंद ने दीप्ति का समर्थन किया

दीप्ति रावत के बयान के बाद सोनिया आनंद ने भी अपना पक्ष रखा. यहां एक दिलचस्प बात सामने आई. सोनिया ने दीप्ति का विरोध करने के बजाय उनका समर्थन किया. उन्होंने कहा कि दीप्ति रावत, हरक सिंह रावत की धर्मपत्नी हैं. उन्हें अपने परिवार और निजी जिंदगी के सम्मान की रक्षा करने का पूरा अधिकार है. सोनिया ने यह भी कहा कि अगर दीप्ति अदालत जाती हैं तो वह उनके साथ खड़ी रहेंगी. लेकिन जब सोनिया से पूछा गया कि हरक सिंह रावत के साथ उनका रिश्ता क्या है, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया. सोनिया का कहना था कि उनकी निजी जिंदगी के बारे में सवाल करने का किसी को अधिकार नहीं है. उन्होंने इस सवाल को संपत्ति विवाद से अलग बताया.

भवन को लेकर सोनिया और हरिओम के बीच क्या विवाद है?

अब उस भवन विवाद पर आते हैं, जहां से यह पूरी कहानी शुरू हुई थी. सोनिया आनंद के मुताबिक, हरिओम सहगल ने उन्हें एक हॉस्टल बेचा था. लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि संपत्ति की लीज उनकी पत्नी सीमा सहगल के नाम पर है. सोनिया का दावा है कि उन्होंने हरिओम को आधा भुगतान किया था. इसके अलावा हरिओम के कहने पर उनकी पत्नी सीमा सहगल को भी 25 लाख रुपये दिए थे. सोनिया का कहना है कि इन भुगतानों के कानूनी दस्तावेज उनके पास हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में हरिओम अपनी पत्नी से अलग हो गए. इसके बाद वह उनसे दोबारा पैसे मांगने लगे. सोनिया ने हरिओम पर चेक बाउंस कराने की धमकी देने का भी आरोप लगाया. सोनिया के मुताबिक, यह संपत्ति विवाद पिछले पांच साल से चल रहा है और मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है. उन्होंने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए. सोनिया का आरोप है कि पुलिस ने उनका पक्ष जानने या दस्तावेज मांगने के लिए उनसे संपर्क नहीं किया. इसके बावजूद मीडिया में उनकी छवि खराब की जा रही है.

सोनिया ने CM धामी और गणेश जोशी पर भी लगाए आरोप

सोनिया आनंद ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश से भी जोड़ा. उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया. सोनिया का दावा है कि वह मसूरी विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं और आगामी चुनाव की तैयारी कर रही हैं. इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर जांच में वह गलत साबित होती हैं तो राजनीति छोड़ देंगी. लेकिन अगर आरोप गलत साबित हुए तो वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी.

अब कहानी में भावना पांडे की एंट्री, दीप्ति को दी चुनौती

दीप्ति रावत ने मीडिया के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी थी. इसके बाद राजनीतिक कार्यकर्ता भावना पांडे भी इस विवाद में शामिल हो गईं. भावना पांडे ने वीडियो जारी कर दीप्ति रावत को चुनौती दी. उन्होंने कहा कि अगर दीप्ति पत्रकारों के खिलाफ हाईकोर्ट जाना चाहती हैं तो वह भी उनके साथ अदालत जाएंगी. भावना ने कहा कि उनकी हरक सिंह रावत से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है. लेकिन उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि हरक सिंह रावत उमेश जैसे व्यक्ति का समर्थन कर रहे हैं. भावना ने उमेश को उत्तराखंड का विरोधी बताया. उन्होंने कुछ पत्रकारों को लेकर भी आरोप लगाए. भावना का दावा है कि कुछ पत्रकार सोनिया रावत के घर जाकर हरक सिंह रावत और सोनिया के बयान लेते हैं.

भावना का दावा: दीप्ति-सोनिया 25 साल से परिचित

भावना पांडे ने अपने बयान में दीप्ति रावत और सोनिया आनंद की पुरानी जान-पहचान का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि दीप्ति रावत, सोनिया को करीब 25 साल से जानती हैं. दोनों के बीच पहले भी झगड़ा हो चुका है. भावना ने एक पार्लर में सोनिया और दीप्ति के बीच हुई कथित लड़ाई का भी जिक्र किया. उन्होंने दीप्ति से सवाल किया कि वह अपने पति के कथित दूसरे संबंधों और पारिवारिक विवादों को लेकर क्या कहेंगी? भावना पांडे ने अपने बयान में 'सौतन' और 'जुदाई' जैसी फिल्मों का उदाहरण भी दिया. इन फिल्मों का जिक्र करते हुए उन्होंने दीप्ति रावत पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता को इस पूरे मामले में बेवकूफ नहीं बनाया जाना चाहिए. हालांकि, भावना ने दीप्ति और सोनिया की पुरानी जान-पहचान तथा झगड़े को लेकर जो बातें कहीं, वे उनके अपने दावे हैं. भावना पांडे ने डीएनए टेस्ट का मुद्दा भी उठा दिया. 

भावना पांडे ने उठाया DNA टेस्ट का मुद्दा 

भावना पांडे ने हरक सिंह रावत से जुड़े पुराने जेनी प्रकरण का भी जिक्र किया. भावना ने जेनी के बच्चे और सोनिया व उनके बच्चों के डीएनए टेस्ट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें धमकियां दी गईं तो वह अदालत के माध्यम से डीएनए टेस्ट कराने की बात भी सामने रखेंगी. इस तरह भावना पांडे ने मौजूदा पारिवारिक विवाद के साथ हरक सिंह रावत के पुराने जेनी प्रकरण को भी जोड़ दिया.

दिलीप रावत बोले: हरक सिंह को कम बोलना चाहिए

भावना पांडे के अलावा लैंसडाउन से भाजपा विधायक महंत दिलीप रावत ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने हरक सिंह रावत को ज्यादा बोलने से बचने की सलाह दी. दिलीप रावत ने कहा कि जो आदमी ज्यादा बोलता है, वह कई बार अपनी ही बातों में फंस जाता है. चाहे राजनीति हो या सामान्य जीवन, कम बोलना बेहतर रहता है. उन्होंने हरक सिंह रावत के बोलने के तरीके पर भी तंज कसा.

दिलीप रावत ने कहा कि हर किसी को अपना चेला या अनुयायी बता देना ठीक नहीं है. हर किसी पर अपना एहसान जताना भी सही नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी को चाय-पानी पिलाने या कुर्सी पर बैठाने जैसी बातें गिनाने से आदमी खुद ही मुश्किल में पड़ता है. हालांकि, दिलीप रावत ने यह भी कहा कि यह हरक सिंह रावत का पारिवारिक मामला है. इसलिए वह इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते.

दिलीप रावत बोले- दीप्ति की पीड़ा देखी, हरक को सच्चाई बतानी चाहिए

दिलीप रावत ने अपने बयान में दीप्ति रावत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह दीप्ति रावत की पीड़ा देख रहे थे. इस पूरे मामले से उन्हें बहुत दुख पहुंचा है. वह काफी आहत हैं. दिलीप रावत के मुताबिक, हरक सिंह रावत को दीप्ति के सामने पूरी स्थिति साफ करनी चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि वास्तविकता क्या है, उनकी वास्तविक पत्नी कौन हैं और जो दूसरी महिला को लेकर दावा किया जा रहा है, उसका आधार क्या है. दिलीप रावत ने कहा कि अगर कोई गलत दावा कर रहा है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए.

धारी देवी की कसम का जिक्र कर हरक सिंह पर कसा तंज

दिलीप रावत ने हरक सिंह रावत के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत ने एक बार धारी देवी की कसम खाई थी कि वह कभी मंत्री पद नहीं लेंगे और मुख्यमंत्री पद का लाभ नहीं उठाएंगे. लेकिन दिलीप रावत के मुताबिक, कसम खाने के करीब 15 दिन बाद ही हरक सिंह रावत मंत्री बन गए थे. इस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब जनता ऐसी कसमों पर ज्यादा भरोसा नहीं करती. दिलीप रावत ने यहां तक कहा कि ऊपर बैठे देवी-देवता भी इन बातों का संज्ञान ले रहे होंगे. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति देवभूमि की पहचान के अनुरूप होनी चाहिए. राजनीति निष्पक्ष होनी चाहिए और नेताओं को अपने चरित्र की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए.

दिलीप रावत ने यह भी कहा कि पहले उत्तराखंड की राजनीति में चरित्र से जुड़े ऐसे मामले इस तरह सामने नहीं आते थे. उन्होंने इस दौरान अरविंद जी का जिक्र किया और कहा कि उनकी समझ से इस तरह की बातों की शुरुआत भी वहीं से हुई थी और शायद अब इसका अंतिम दौर आ गया है.

दिलीप रावत ने जेनी प्रकरण का भी जिक्र किया

दिलीप रावत ने हरक सिंह रावत पर निशाना साधते हुए 2003 के जेनी प्रकरण को भी उठाया. उन्होंने कहा कि जब जेनीका कांड हुआ था, तब हरक सिंह रावत भाजपा में नहीं थे. उस समय वह कांग्रेस में थे और कांग्रेस सरकार में मंत्री थे. दिलीप रावत के मुताबिक, हरक सिंह रावत ने कांग्रेस के सदन में ही इस्तीफा दिया था. उन्होंने कहा कि आज तक यह पता नहीं चल पाया कि जेनीका के बच्चे के वास्तविक पिता कौन थे.

दिलीप रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की टिप्पणी का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा के प्रवक्ता भी हैं. अगर कोई पार्टी या सरकार पर गलत आरोप लगाएगा तो उसकी प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है. मुख्यमंत्री ने भी उसी के जवाब में अपनी बात कही थी. हालांकि, दिलीप रावत ने यह भी कहा कि हरक सिंह रावत उनसे वरिष्ठ हैं. इसलिए वह उन पर ज्यादा व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाना चाहते.

अब पूरा विवाद कहां पहुंच गया है?

तो पूरी कहानी को समझें तो इसकी शुरुआत देहरादून के एक भवन पर कब्जे के आरोप से हुई थी. हरिओम सहगल ने सोनिया आनंद पर आरोप लगाए. साथ ही उन्हें हरक सिंह रावत की पत्नी बताया. इसके बाद हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत सामने आईं. उन्होंने सोनिया को हरक की पत्नी बताए जाने पर आपत्ति जताई और भ्रामक खबरों के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी दी.

सोनिया आनंद ने दीप्ति का समर्थन किया. लेकिन हरक सिंह रावत के साथ अपने रिश्ते पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने संपत्ति विवाद में खुद पर लगे आरोपों को भी गलत बताया. इसके बाद भावना पांडे ने दीप्ति और सोनिया की 25 साल पुरानी जान-पहचान, कथित झगड़े और डीएनए टेस्ट को लेकर सवाल उठाए.

वहीं भाजपा विधायक दिलीप रावत ने हरक सिंह रावत को कम बोलने की सलाह दी. उन्होंने धारी देवी की कसम और पुराने जेनी प्रकरण का भी जिक्र किया. दूसरी तरफ 23 साल पुराने जेनी प्रकरण में जेनी खुद सामने आई हैं. उन्होंने दावा किया है कि वह जल्द ही सबूतों के साथ पूरी सच्चाई बताएंगी.

(इनपुट: अंकित शर्मा)

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