केदारताल हादसे में लखनऊ की दो सगी बहनों वर्तिका-दीपिका की मौत, भाई ने बताई पूरी कहानी, 4 की तलाश जारी

उत्तराखंड के केदारताल ट्रेक पर 27 अक्टूबर को 12 लोगों का एक दल गंगोत्री से रवाना हुआ था. दल को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था, लेकिन रास्ते में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन ने मुश्किलें बढ़ा दीं. बताया जा रहा है कि इलाके में तीन हिमस्खलन आए, जिनकी चपेट में ट्रेकिंग दल के सदस्य आ गए. इसके बाद से लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. बुधवार, 4 नवंबर को इस अभियान में दो और शव बरामद हुए.

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केदारताल ट्रेक पर हुए हादसे में रेस्क्यू टीमों को बुधवार, 4 नवंबर को दो और शव मिले हैं. दोनों शव दो सगी बहनों के हैं. इसके साथ ही हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. हालांकि, अभी भी चार लोग लापता हैं. उनकी तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान जारी है.

दोनों बहनों की पहचान उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी वर्तिका वर्मा (28) और दीपिका वर्मा (29) के रूप में हुई है. दोनों गायत्रीपुरम की रहने वाली थीं. हादसे में जान गंवाने वाली दोनों बहनें मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करती थीं. वे घर से ही काम करती थीं और उन्हें पहाड़ों में घूमने और ट्रेकिंग का शौक था.

दोनों बहनों के भाई ने एजेंसी पर लगाए आरोप

दोनों बहनों के भाई अतुल वर्मा भी उत्तरकाशी पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें हादसे की जानकारी ट्रेकिंग एजेंसी सोल सीकर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिली थी. अतुल का आरोप है कि एजेंसी ने परिवार को हादसे की जानकारी नहीं दी. संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

अतुल ने एजेंसी पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि मौसम की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया. हादसे के बाद एजेंसी की जिम्मेदारी थी कि वह सबसे पहले परिजनों को इसकी जानकारी देती. अतुल ने बताया कि उनकी दोनों बहनों को ट्रेकिंग का काफी शौक था. इसी साल अगस्त में वे चमोली की फूलों की घाटी भी घूमने गई थीं.

चारों शव जिला अस्पताल पहुंचाए गए

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, खराब मौसम, भारी बर्फबारी और मुश्किल पहाड़ी रास्तों के बावजूद केदारताल में सर्च ऑपरेशन जारी है. बुधवार को रेस्क्यू टीमों ने दो और शव बरामद किए.

चारों शवों को हेलीकॉप्टर से मातली हेलीपैड लाया गया. इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया. यहां पोस्टमार्टम और पहचान की प्रक्रिया चल रही है. दो शवों की पहचान हो चुकी है, जबकि बाकी दो की पहचान के लिए परिजनों के उत्तरकाशी पहुंचने का इंतजार है. उनके हरिद्वार पहुंचने की सूचना है. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे.

हेलीकॉप्टर से भेजी जा रही राहत सामग्री

रेस्क्यू अभियान में जुटी टीमों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने भी व्यवस्था की है. मातली हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के जरिए राशन, उपकरण और दूसरी जरूरी सामग्री केदारताल भेजी जा रही है. जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है. मातली हेलीपैड पर सुबह से ही संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे.

इस अभियान में जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ, पूर्ति विभाग और आईटीबीपी की टीमें जुटी हैं. प्रशासन की कोशिश है कि ऊंचाई पर मुश्किल हालात में काम कर रही रेस्क्यू टीमों को जरूरी संसाधनों की कमी न हो.

27 अक्टूबर को ट्रेकिंग के लिए निकला था 12 लोगों का दल

दरअसल, 27 अक्टूबर को 12 सदस्यों का एक दल गंगोत्री से केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुआ था. इस दल में एक स्थानीय गाइड, उत्तर प्रदेश के दो और पश्चिम बंगाल के पांच ट्रेकर शामिल थे. इनके अलावा एक कुक और तीन पोर्टर भी दल का हिस्सा थे.

दल को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था. लेकिन रास्ते में भारी बर्फबारी हो गई. इसके चलते सभी सदस्य पहाड़ों में फंस गए. सूत्रों के मुताबिक, इलाके में तीन हिमस्खलन भी आए थे. इसी दौरान ट्रेकिंग दल के सदस्य इसकी चपेट में आ गए.

अब तक चार लोगों के शव बरामद हो चुके हैं. चार लोग अभी भी लापता हैं. उनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें लगातार जुटी हुई हैं. वहीं, अपनों का इंतजार कर रहे परिवारों की चिंता भी बढ़ती जा रही है.

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