नाक में नथ, सिर पर मुकुट और ओढ़ा पिछौड़ा! थाईलैंड की मोराया ने बागेश्वर के नवीन से रचाई शादी, जानें कैसे शुरू हुई दोनों की लव स्टोरी

Moraya Naveen love story: उत्तराखंड के नवीन परिहार और थाईलैंड की मोराया की प्रेम कहानी अब शादी के मुकाम तक पहुंच गई है. करीब तीन साल पहले दुबई में मिले इस कपल ने हल्द्वानी के शीतला देवी मंदिर में कुमाऊनी रीति-रिवाज से सात फेरे लिए. शादी की रस्में समझने के लिए मोराया ने ट्रांसलेटर की मदद ली. जानिए पूरी कहानी.

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थाईलैंड की मोराया ने बागेश्वर के  नवीन रचाई शादी
थाईलैंड की मोराया ने बागेश्वर के नवीन रचाई शादी
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Thailand girl married in Uttarakhand: कहते हैं कि प्यार किसी सीमा या बंधन को नहीं मानता. थाईलैंड की मोराया और उत्तराखंड के नवीन परिहार ने इस बात को सच कर दिखाया है. दोनों ने मंगलवार को विजयादशमी के शुभ अवसर पर हल्द्वानी के शीतला देवी मंदिर में एक-दूसरे का हाथ थाम लिया. थाईलैंड की रहने वाली मोराया ने पारंपरिक कुमाऊनी वेशभूषा में पूरे विधि-विधान से सात फेरे लिए.

इस शादी के दौरान मोराया ने कुमाऊनी रीति-रिवाजों और परंपराओं को समझने के लिए जो तरीका अपनाया, उसकी भी खूब चर्चा हो रही है. विदेशी दुल्हन और पहाड़ी दूल्हे की यह अनोखी शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. आखिर कैसे शुरू हुई मोराया और नवीन की प्रेम कहानी? दोनों पहली बार कहां मिले और कैसे उनका रिश्ता शादी तक पहुंचा? आइए, विस्तार से जानते हैं उनकी प्रेम कहानी.

पहले जानते हैं कैसे शुरू हुई  प्रेम कहानी

नवीन परिहार बागेश्वर जिले के उडल गांव के रहने वाले हैं. उन्हाेंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की हुई है. ऐसे में नौकरी के सिलिसले में उन्होंने दुबई का रुख किया. इस दौरान करीब तीन साल पहले दुबई में उनकी मुलाकात मोराया से हुई. दोनों में बातचीत शुरू हुई. मेलजोल बढ़ा तो दोनों की दोस्ती गहरी होती चली गई. फिर धीरे धीरे ये बातचीत प्यार में बदल गई. इसके बाद दोनों ने एक साथ जीवन बिताने का फैसला किया.लेकिन इसके लिए दोनों को अपने अपने परिवारों की सहमति की जरुरत थी. जैसे ही ये परमिशन मिली तो दोनों ने शादी के बंधन में बंधने का निर्णय लिया.

ट्रांसलेटर की मदद से समझीं शादी की रस्में

आखिरकार मंगलवार को वो दिन आ ही गई. इसके लिए मोराया अपने भाई और भाभी के साथ थाईलैंड से उत्तराखंड के हल्द्वानी पहुंचीं. अब चूंकि नवीन उत्तराखंड के कुमाऊं के रहने वाले हैं. ऐसे में उनकी शादी कुमाऊं रीति रिवाज से होनी थी. लेकिन मोराया के लिए ये सब परंपराएं नई  थी. ऐसे में उसने शादी की रस्मों और मंत्रों को समझने के लिए एक ट्रांसलेटर की मदद ली, जो इन सभी मंत्रों को अंग्रेजी भाषा में ट्रांसलेट कर समझाया. इस दौरान मोराया के भाई और भाभी भीने कुमाऊनी रीति-रिवाज के अनुसार कन्यादान की रस्म भी निभाई.

पहाड़ी रूप में नजर आईं थाई दुल्हन

शादी के दौरान मोराया का पहनावा पूरी तरह से उत्तराखंड की संस्कृति में ढला हुआ था. उनके सिर पर पारंपरिक मुकुट, चेहरे पर बड़ी कुमाऊनी नथ, मांग टीका और गले में मंगलसूत्र पहनी हुई थी. ऐसे में मोराया एक दम परफेक्ट कुमाऊनी दुल्हन लग रही थीं. उनका यह लुक देखकर हर कोई हैरान रह गया. बता दें कि नवीन की बहन का घर हल्द्वानी के देवलचौड़ इलाके में स्थित है. इसी वजह से शादी के सारे कार्यक्रम यहीं संपन्न कराए गए. मंदिर में पंडित जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया. 

पैतृक गांव जाकर लेंगे बड़ों का आशीर्वाद

नवीन के पिता पूरन सिंह परिहार बीएसएफ से रिटायर हुए हैं. इस दौरान उन्होंने कहा कि वे अपने बेटे की पसंद से बहुत खुश है.  अब शादी संपन्न होने के बाद अब यह नवविवाहित जोड़ा अपने पैतृक गांव बागेश्वर के लिए रवाना होगा. वहां गांव के बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जाएगा और मोराया को कुमाऊं की समृद्ध संस्कृति और गांव के माहौल से रूबरू कराया जाएगा.

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