Guru Asta 2026: 14 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति हो रहे हैं अस्त, इन 6 राशियों की बढ़ सकती है टेंशन, जानें बचने के अचूक उपाय
न्यूज तक डेस्क
• 02:45 PM • 05 Jul 2026
14 जुलाई 2026 को देवगुरु बृहस्पति सूर्य के निकट आकर अस्त होने जा रहे हैं, जिससे उनके शुभ प्रभाव में कुछ समय के लिए कमी आएगी. इस खगोलीय बदलाव के कारण इन राशि वालों पर असर पड़ेगा.
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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य के नजदीक जब भी कोई दूसरा ग्रह आता है, तो उसका तेज कुछ समय के लिए धीमा पड़ जाता है. इस खगोलीय घटना को ग्रहों का अस्त होना कहा जाता है. इस साल 14 जुलाई 2026 को सुख, समृद्धि, बुद्धि और वैवाहिक जीवन के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति अस्त होने जा रहे हैं. गुरु के अस्त होते ही शुभ कार्यों की गति थोड़ी धीमी हो जाती है और इंसान को भाग्य का साथ मिलने में कठिनाई आती है. वैसे तो इस बदलाव का असर हर इंसान पर पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार 6 राशियों को इस दौरान बेहद संभलकर रहने की जरूरत होगी.


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पहली राशि मेष है, जिन्हें इस अवधि में अपने फैसलों पर पूरी तरह से नियंत्रण रखना होगा. गुरु की कमजोर स्थिति आपकी सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जिससे गलत निर्णय होने की आशंका बढ़ जाती है. इस दौरान किसी भी नए व्यापार की शुरुआत या बड़े निवेश से बचें, अन्यथा आपकी मेहनत की कमाई कहीं फंस सकती है. दूसरी तरफ कर्क राशि के जातकों को अपने वित्तीय प्रबंधन पर खास ध्यान देना होगा. आपकी आमदनी स्थिर रहने के बावजूद अचानक बड़े खर्चे सामने आ सकते हैं, जो आपके बजट को बिगाड़ देंगे. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या मनचाही जगह ट्रांसफर के लिए अभी थोड़ा और धैर्य रखना होगा.
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सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय वर्कप्लेस पर थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. दफ्तर में काम का दबाव अचानक बढ़ेगा, जिससे मानसिक तनाव होना स्वाभाविक है. इस दौरान सहकर्मियों के साथ अनबन की स्थिति भी बन सकती है, जिसका सीधा असर आपकी नींद और सेहत पर पड़ेगा. वहीं वृश्चिक राशि वालों को इस समय किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए. पैसों का लेन-देन इस अवधि में आपके बने-बनाए रिश्तों को खराब कर सकता है, इसलिए न तो किसी को उधार दें और न ही दूसरों के फटे में टांग अड़ाएं.


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चूंकि देवगुरु बृहस्पति धनु राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस राशि के जातकों के आत्मविश्वास में सीधे तौर पर कमी देखी जा सकती है. आपके करियर की जो गाड़ी अब तक सरपट दौड़ रही थी, उसमें अचानक ब्रेक लग सकता है. इस समय को किसी नए प्रोजेक्ट में निवेश करने के बजाय अपने पुराने और अधूरे पड़े कामों को निपटाने में इस्तेमाल करें. इसके साथ ही गुरु की दूसरी राशि यानी मीन के जातकों को भी इस दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखना पड़ सकता है. आपके काम अंतिम मोड़ पर आकर अटक सकते हैं, जिससे स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है. आर्थिक तंगी से बचने के लिए अभी से हाथ समेटकर चलें और अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि पेट और लिवर से जुड़ी तकलीफें बढ़ सकती हैं.
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बृहस्पति के इस नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिष में कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक उपाय बताए गए हैं. जब मुख्य ग्रह का बल कम होता है, तो हमें अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाना पड़ता है. इसके लिए हर गुरुवार को भगवान विष्णु और महादेव की पूजा करें और अपने माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाना न भूलें. यह छोटा सा काम आपकी मानसिक शांति को बनाए रखने में काफी मददगार साबित होगा.


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इसके अलावा अपने आचार-विचार और जीवनशैली को जितना हो सके सात्विक रखें. इस पूरी अवधि के दौरान तामसिक भोजन और नशीली चीजों से पूरी तरह दूरी बना लेना ही आपके हित में रहेगा. दान-पुण्य करने से भी गुरु का दोष शांत होता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ पैसों का दान काफी नहीं है, बल्कि किसी जरूरतमंद या अनाथ बच्चे की पढ़ाई-लिखाई में मदद करना और भूखे को खाना खिलाना सबसे उत्तम माना गया है.
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अंत में सबसे जरूरी बात यह याद रखें कि जब समय विपरीत हो, तो बहसबाजी से दूर रहना ही समझदारी है. इस दौरान जितना हो सके मौन रहने का अभ्यास करें, ताकि आपकी सकारात्मक ऊर्जा बेकार के विवादों में नष्ट न हो. गुरु का यह गोचर आपकी परीक्षा का समय हो सकता है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी, संयम और अनुशासन के बल पर आप इन चुनौतियों को आसानी से पार कर सकते हैं.











