Anant Singh shapat grahan: बिहार की राजनीति में चर्चाओं में रहने वाले मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह ने मंगलवार को औपचारिक रूप से विधायक पद की शपथ ले ली है. अनंत सिंह दुलारचंद यादव हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं ऐसे में उन्हें केवल शपथ ग्रहण के लिए बाहर आने की अनुमति मिली है. इस बार भी उन्होंने बिना पढ़ें ही अपने पूराने अंदाज यानी बिना कागज में देखें शपथ ली. हालांकि, शपथ के दौरान उनकी आवाज को बंद कर दिया गया था.
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आपको बता दें कि बिहार विधानसभा के कुल 243 सदस्यों में से अब तक 242 सदस्य शपथ ले चुके हैं और अनंत सिंह अंतिम सदस्य के रूप में इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे. कानूनी प्रतिबंधों के कारण वे विधानसभा में किसी अन्य गतिविधि में हिस्सा नहीं ले पाएंगे.
चुनावी माहौल में हुई थी हत्या
दुलारचंद यादव की हत्या विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी. इस मामले में अनंत सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया था और तब से वे न्यायिक अभिरक्षा में हैं. रिहाई के लिए उनकी ओर से सिविल कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन सुनवाई के बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया.
क्या है पूरा घटनाक्रम?
जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव चुनाव प्रचार कर रहे थे. दुलारचंद मोकामा क्षेत्र में एक प्रभावशाली नेता माने जाते थे और उनका राजनीतिक जुड़ाव कभी लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे दिग्गज नेताओं से भी रहा था. इसी दौरान अनंत सिंह के काफिले और विरोधी पक्ष के समर्थकों के बीच आमना-सामना हो गया. पहले कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसा में बदल गई. हालात बिगड़ने पर फायरिंग हुई, जिसमें दुलारचंद यादव के पैर में गोली लग गई.
गाड़ी से कुचलने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि गोली लगने के बाद अनंत सिंह के समर्थकों ने दुलारचंद यादव को वाहन से कुचलकर उनकी जान ले ली. पुलिस का कहना है कि मौत की मुख्य वजह भारी वस्तु के नीचे दबना रही, हालांकि गोली लगने की पुष्टि भी जांच में हुई है. इस मामले में अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया. घटना के कुछ दिन बाद, 2 नवंबर को पटना पुलिस ने अनंत सिंह को उनके दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया. तब से वे बेऊर जेल में बंद हैं. इस केस में अब तक 80 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच पटना पुलिस व सीआईडी द्वारा की जा रही है.
जेल से ही जीता चुनाव
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जेल में बंद रहने के बावजूद अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की, जिससे यह मामला राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन गया.
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