Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case: बिहार में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद लगातार कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे इन सवालों के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का एक बयान सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है. ओवैसी ने इस मुठभेड़ को लेकर पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे सवाल दागे हैं और एनकाउंटर की पूरी प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है.
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क्या सिर्फ मुसलमानों की बात करते हैं ओवैसी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने बयान में असदुद्दीन ओवैसी ने खुद पर लगने वाले आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर सवाल करते हैं कि क्या वह सिर्फ मुसलमानों की बात करते हैं. इसका जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा कि वह मुसलमान और दलित की बात इसलिए करते हैं क्योंकि सबसे ज्यादा जुल्म उन्हीं पर होता है. लेकिन नाइंसाफी जहां भी होगी, वह उसके खिलाफ आवाज उठाएंगे. इसी संदर्भ में उन्होंने बिहार के भरत भूषण तिवारी मामले का पुरजोर जिक्र किया.
ओवैसी ने रखा अखबार की रिपोर्ट का हवाला
ओवैसी ने बयान में दावा किया कि बिहार में एक 28 साल के नौजवान बच्चे भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर करके उसे गोली मार दी गई. उन्होंने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस नौजवान ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस वालों ने घेरा बनाकर उसे पहले दो गोलियां मारीं. इसके बाद जब उसे पुलिस की गाड़ी में डाला गया, तब तीन और गोलियां मारी गईं जिससे उसकी मौत हो गई. ओवैसी ने जोर देकर कहा कि वह एनकाउंटर के सख्त खिलाफ हैं और हमेशा रहेंगे क्योंकि जब देश में अदालत, कानून और संविधान मौजूद हैं तो एनकाउंटर के जरिए इंसाफ नहीं किया जा सकता.
कौन था भरत भूषण तिवारी और क्या है पूरा मामला
भरत तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलौटी गांव के रहने वाले थे. वह स्थानीय स्तर पर काफी सक्रिय और सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहने वाले युवा थे. बीते 17 जून को एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान उनकी मौत हो गई थी. भरत के परिजनों का भी यही आरोप है कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई. इस घटना के बाद से ही इलाके में भारी आक्रोश देखा गया और स्थानीय लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शनों के साथ-साथ महापंचायत भी आयोजित की गई.
सरकार ने बैठाई न्यायिक जांच, सुप्रीम कोर्ट ने कहा हाईकोर्ट जाएं
मामले को लेकर बढ़ते विवाद और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच राज्य सरकार ने इस पूरे एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि न्यायिक जांच से घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सकेगा. दूसरी तरफ, इस एनकाउंटर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को सबसे पहले हाई कोर्ट जाने की बात कही है. इस अदालती रुख के बाद मामले की कानूनी दिशा को लेकर नई बहस छिड़ गई है.
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