Bankipur By-Election: प्रशांत किशोर ने बांकीपुर को क्यों बनाया प्रतिष्ठा की सीट? जन सुराज झोंकेगी पूरी ताकत

Bankipur Seat: बांकीपुर उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है. चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है. बीजेपी के गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर जनसुराज पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है. जानिए क्यों यह उपचुनाव पीके के राजनीतिक भविष्य, युवा वोट बैंक और बिहार की बदलती राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

Bankipur By Election
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आशीष अभिनव

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बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट एक बार फिर से सबसे बड़ी हॉट सीट बनकर उभरी है. भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नितिन नबीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई है, जिस पर अब उपचुनाव होने जा रहा है. चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को लेकर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. वे इन दिनों जहां भी जा रहे हैं, खुलकर बांकीपुर सीट को लेकर बयान दे रहे हैं. प्रशांत किशोर ने खुला ऐलान किया है कि उनके पास जो भी संसाधन, शक्ति और व्यवस्था है, वे सब कुछ इस सीट पर झोंक देंगे ताकि लंबे समय से अजेय रही भारतीय जनता पार्टी को उनके ही घर में मात दी जा सके.

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क्यों खास है बांकीपुर विधानसभा सीट का सियासी गणित!

बांकीपुर विधानसभा सीट को समझने के लिए इसके इतिहास और जातिगत समीकरण को जानना जरूरी है. यह सीट पिछले कई दशकों से भारतीय जनता पार्टी का एक मजबूत गढ़ रही है. पिछले पांच बार से यहां से नितिन नवीन विधायक रहे हैं, जो नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं, और उनसे पहले उनके पिता भी इस सीट से प्रतिनिधित्व करते आए हैं. जातिगत समीकरण के लिहाज से यह इलाका कायस्थ बाहुल्य माना जाता है. 

इस सीट की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2015 में जब लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस का महागठबंधन बेहद मजबूत स्थिति में था, तब भी विपक्ष इस सीट पर बीजेपी को हराने में नाकाम रहा था. अब चूंकि यहां के पूर्व विधायक राष्ट्रीय स्तर का बड़ा चेहरा बन चुके हैं, इसलिए इस सीट पर होने वाला उपचुनाव हर दल के लिए नाक की लड़ाई बन गया है.

जनसुराज के अस्तित्व और वैधता की बड़ी लड़ाई

प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के लिए यह उपचुनाव बेहद अहम है क्योंकि पार्टी ने अब तक चुनावी राजनीति में सफलता का स्वाद नहीं चखा है. हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी शून्य पर सिमट गई थी, जिसके कारण उन पर और उनकी पार्टी की जमीनी पकड़ पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव जन सुराज के लिए खुद को एक वैध राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने का सुनहरा मौका है. 

हाल ही में हुए एमएलसी उपचुनाव में आरजेडी ने बक्सर सीट पर जीत हासिल की थी, जिससे उनके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा था. प्रशांत किशोर भी जानते हैं कि अगर वे बांकीपुर में कोई बड़ा उलटफेर कर देते हैं, तो इससे न सिर्फ उनके कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेगा, बल्कि आम जनता के बीच भी जन सुराज की स्वीकार्यता और चर्चा काफी बढ़ जाएगी.

परंपरागत राजनीतिक दलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति

इस उपचुनाव के जरिए प्रशांत किशोर बिहार की स्थापित पार्टियों जैसे बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी पर एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहते हैं. प्रशांत किशोर बिहार की जनता के सामने एक नए विजन के साथ विकल्प बनकर उभरने की कोशिश कर रहे हैं. अगर जनसुराज इस कठिन मानी जाने वाली शहरी सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब होती है, तो परंपरागत राजनीतिक दलों को अपनी रणनीतियों को बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा. इससे यह संदेश जाएगा कि बिहार में एक नए विकल्प की शुरुआत हो चुकी है और जनता अब बदलाव के मूड में है. इस जीत से साल 2030 और आने वाले अन्य चुनावों के लिए जन सुराज के पक्ष में एक मजबूत नैरेटिव तैयार होगा कि यह पार्टी सिर्फ चुनाव लड़ती ही नहीं बल्कि जीतना भी जानती है.

शहरी और युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश

बांकीपुर पूरी तरह से पटना का एक मुख्य शहरी इलाका है, जहां शहरी मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है. प्रशांत किशोर की सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच काफी अच्छी पकड़ मानी जाती है. पीके की रणनीति यह है कि सोशल मीडिया की इस पहुंच और लोकप्रियता को बैलेट पेपर यानी वोटों में बदला जाए.

अगर शहरी युवा इस चुनाव में जन सुराज के साथ खुलकर जुड़ते हैं, तो प्रशांत किशोर की उस मुहिम को जमीनी मान्यता मिलेगी जिसके तहत वे लगातार लोगों से नए बिहार के निर्माण के लिए जुड़ने की अपील कर रहे हैं. युवाओं का यह झुकाव भविष्य की राजनीति के लिए जन सुराज को एक स्थापित राजनीतिक दल के रूप में पहचान दिला सकता है.

हिसाब बराबर करने के मूड में प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर बीजेपी पर आरोप लगाया है कि पिछले चुनाव में जन सुराज को हराने के लिए पैसे बांटकर वोट खरीदे गए थे. पीके का कहना है कि अगर भाजपा को राजनीतिक सबक सिखाना है और हिसाब बराबर करना है, तो उन्हें उनके ही मकान और उनके ही इलाके में घुसकर हराना होगा.

वहीं दूसरी तरफ, इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है. भाजपा की ओर से कई बड़े नामों की चर्चा चल रही है, जिसमें पवन सिंह का नाम भी शामिल है. वहीं, महागठबंधन भी इस सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहा है. त्रिकोणीय मुकाबले के बीच प्रशांत किशोर का यह आक्रामक अंदाज बांकीपुर के चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रहा है.

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बांकीपुर उपचुनाव से पहले बढ़ी सियासी तपिश, क्या PK और पवन सिंह के बीच होगा असली चुनावी दंगल?

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