बिहार में बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो चुकी है, हालांकि अभी तक इसके उपचुनाव को लेकर किसी भी तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इस समय सूबे में 10 सीटों पर एमएलसी चुनाव होने हैं, जिसकी तारीखों का एलान हो चुका है. लेकिन इन सबके बीच बिहार के सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी सीट की हो रही है, तो वह पटना जिले के अंतर्गत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट की ही है. यह चर्चा किसी और की वजह से नहीं बल्कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के बयानों और दावों के कारण हो रही है. इस सीट को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा चुका है.
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बीजेपी का 45 साल पुराना अभेद्य किला है बांकीपुर
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले 40 से 45 सालों से भाजपा का एक मजबूत और अभेद्य किला रही है. इस सीट से नितिन नबीन विधायक हुआ करते थे, जो अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं और राज्यसभा चले गए हैं. नितिन नबीन से पहले उनके पिता इस सीट से विधायक हुआ करते थे. पिता के निधन के बाद नितिन ने इस विरासत को संभाला और लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे. साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी नितिन ने राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार को लगभग 51,000 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी. इस चुनाव में जनसुराज की तरफ से वंदना कुमारी भी मैदान में थीं, लेकिन वह भी बीजेपी के इस गढ़ को हिला नहीं सकी थीं.
प्रशांत किशोर का बड़ा दावा और राष्ट्रीय संदेश देने की कोशिश
अब इस खाली हुई सीट पर प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बड़ा दावा ठोक दिया है. प्रशांत किशोर का कहना है कि वे इस बार बीजेपी के इस मजबूत किले को पूरी तरह से ढहा देंगे. वे इसके जरिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं. उनका मानना है कि अगर जनसुराज इस एक सीट पर चुनाव जीत जाती है, तो लोग साल 2025 की सभी 243 सीटों के नतीजों को भूल जाएंगे और सिर्फ इसी एक सीट की जीत की चर्चा करेंगे. चूंकि यह सीट बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की खाली की हुई सीट है, इसलिए पीके का कहना है कि यहां बीजेपी उम्मीदवार को पटखनी देने का संदेश सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे देश में एक बड़ा संदेश जाएगा.
एनडीए सरकार और सम्राट चौधरी पर पीके का तीखा हमला
प्रशांत किशोर ने बिहार की मौजूदा एनडीए सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने जनता के साथ छल किया है और ₹10,000 देकर वोट खरीदे, लेकिन लोगों के जीवन में कोई सुधार नहीं आया. उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के समय एक करोड़ रोजगार की बात कही गई थी, तो छह महीने में कम से कम 10 लाख रोजगार मिलने चाहिए थे, लेकिन रोजगार देने के बजाय सरकार टीआरई-4 के छात्रों पर लाठियां चलवा रही है. राज्य में पलायन पर कोई रोक नहीं लगी है, कोई नई फैक्ट्री नहीं खुली है और अपराध का ग्राफ चरम पर पहुंच चुका है.
पटना में कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने एक बच्ची और उसके पिता के साथ हुई बदसलूकी की घटना का भी जिक्र किया और कहा कि बिहार में जंगलराज साफ दिख रहा है. इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए कहा कि वे गमछे का रंग बदलने और समाज को बांटने के अलावा किसी भी सकारात्मक विषय जैसे पलायन, रोजगार या कानून व्यवस्था पर बात नहीं करते हैं.
रामकृपाल यादव ने दावों को नकारा
प्रशांत किशोर के इन दावों पर बीजेपी ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की है. बीजेपी नेता और दानापुर विधायक रामकृपाल यादव ने पीके के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और हर पार्टी को चुनाव लड़ने की पूरी आजादी है. किसी को चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन प्रशांत किशोर जो दावे कर रहे हैं उसकी हकीकत चुनाव के दौरान सामने आ जाएगी. उन्होंने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि बांकीपुर से भारतीय जनता पार्टी पिछले 40 सालों से लगातार जीतती आ रही है और आगे भी अगले 100 सालों तक बीजेपी ही यहां से जीत दर्ज करती रहेगी.
हवा या हकीकत: क्या दोहराएगा पुराना इतिहास?
प्रशांत किशोर भले ही बांकीपुर को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल माहौल बनाने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं. साल 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी प्रशांत किशोर ने इसी तरह के कई बड़े दावे किए थे. तब चर्चा थी कि वे अपने गृहक्षेत्र करगहर से चुनाव लड़ सकते हैं या फिर तेजस्वी यादव के सामने राघवपुर से ताल ठोक सकते हैं, लेकिन वे खुद किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़े.
2025 के चुनाव में जनसुराज का खाता तक नहीं खुल सका था और उनके उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो गई थीं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशांत किशोर इस बार सच में बांकीपुर से खुद चुनावी मैदान में उतरकर हकीकत में बीजेपी को टक्कर देंगे, या फिर यह भी पिछले चुनाव की तरह सिर्फ एक राजनीतिक हवा ही साबित होगा.
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