बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. बिहार की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली बांकीपुर में पार्टी ने बैक-टू-बैक दो बड़ी गलतियां (ब्लंडर) कर दी हैं. इन वाकयों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे इस महत्वपूर्ण उपचुनाव को लेकर बीजेपी का होमवर्क और तैयारी पूरी तरह से परफेक्ट नहीं थी. यह वही पारंपरिक सीट है जहां साल 1995 से लगातार बीजेपी का कब्जा रहा है और नीतीश सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन यहां से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं. अब जब नितिन नवीन की विरासत को संभालने के लिए यह उपचुनाव हो रहा है, तो बीजेपी एक के बाद एक रणनीतिक गलतियां करती नजर आ रही है.
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24 घंटे के भीतर पहले उम्मीदवार ने किया बैकआउट
बीजेपी ने इस उपचुनाव में सबसे बड़ा ब्लंडर तब किया जब उसके घोषित उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा उर्फ बंटी ने टिकट मिलने के महज 24 घंटे के भीतर ही अपने कदम पीछे खींच लिए. उन्होंने एक पत्र लिखकर और कांपते हुए होठों से अपना इस्तीफा पढ़ते हुए पारिवारिक कारणों का हवाला दिया. हालांकि, अंदरूनी सूत्रों की मानें तो उनके पीछे हटने की कहानी कुछ और ही है.
चर्चा है कि अभिषेक सिन्हा के माता-पिता का नाम कुख्यात चारा घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्हें अदालत से सजा भी हो चुकी है. इसके अलावा उनके नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी कुछ गड़बड़ियों की बात सामने आ रही थी. बीजेपी स्क्रूटनी के दौरान किसी भी तरह की फजीहत से बचना चाहती थी, इसलिए आनन-फानन में उन्हें बैकआउट करवा दिया गया.
आनन-फानन में नए उम्मीदवार की घोषणा
अभिषेक सिन्हा के हटने के बाद बीजेपी ने तुरंत ही एक बेहद जमीनी कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया प्रत्याशी घोषित कर दिया. टिकट मिलने की खबर सुनकर खुद नीरज कुमार सिन्हा भी हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि वह तो अपने बूथ पर मतदाताओं को पर्ची बांटने का काम कर रहे थे, तभी अचानक उनके पास फोन आया कि उन्हें पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है.
एक साधारण बूथ अध्यक्ष और छोटे कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर नीरज सिन्हा ने शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया. लेकिन, बीजेपी की यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और एक नया विवाद खड़ा हो गया.
नए उम्मीदवार के बायोडाटा पर मचा बवाल
नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार घोषित करते ही बीजेपी ने मीडिया और सोशल मीडिया के लिए उनका जो आधिकारिक बायोडाटा जारी किया, उसने पार्टी की फजीहत और बढ़ा दी. जारी किए गए पहले बायोडाटा के अनुसार, नीरज सिन्हा की जन्मतिथि साल 1994 दर्ज थी, जबकि उसी बायोडाटा में उनके बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करने का वर्ष 2006 लिखा हुआ था.
इस हिसाब से महज 12 साल की उम्र में ही उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ले ली थी. सोशल मीडिया पर यह विसंगति वायरल होते ही तीखी चर्चाएं शुरू हो गईं। जब यह विवाद ज्यादा बढ़ने लगा, तो बीजेपी ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करते हुए एक नया संशोधित बायोडाटा जारी किया, जिसमें से पार्टी की सदस्यता वाले साल की पूरी लाइन को ही गायब कर दिया गया.
प्रशांत किशोर की एंट्री से हॉट बनी बांकीपुर सीट
बांकीपुर सीट को हमेशा से बीजेपी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने खुद इस सीट पर पूरी ताकत झोंक रखी है, जिससे यह मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो गया है. पूरे बिहार की नजरें इस सीट के नतीजों पर टिकी हुई हैं.
बिहार भाजपा के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला बड़ा विधानसभा उपचुनाव है, इसलिए इस सीट पर मिलने वाली जीत या हार का सियासी संदेश बहुत बड़ा होने वाला है. लेकिन चुनाव की शुरुआत में ही बीजेपी द्वारा की जा रही इन गलतियों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि यदि आगाज ऐसा है, तो अंजाम कैसा होगा.
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