Bankipur Byelection: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको चौंका दिया है. पार्टी ने टिकट की घोषणा करने के महज 24 घंटे के भीतर ही अपने घोषित उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा की जगह एक आम बूथ स्तर के कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को चुनावी मैदान में उतार दिया है.
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अभिषेक सिन्हा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बेहद कम समय में 'पारिवारिक कारणों' का हवाला देते हुए अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का एलान किया. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इसके पीछे की असली वजह उनका पारिवारिक बैकग्राउंड और बिहार का बहुचर्चित चारा घोटाला है .
क्या है पूरा मामला और 'चारा घोटाला' कनेक्शन?
राजनीतिक सूत्रों और दावों के मुताबिक, अभिषेक सिन्हा की उम्मीदवारी वापस लेने के पीछे उनके माता-पिता का अतीत है जिनका नाम 950 करोड़ रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़ा हुआ है. अभिषेक सिन्हा के पिता रविंद्र प्रसाद सिन्हा चारा घोटाले के दोषियों में से एक रहे हैं. वे 'मेसर्स मगध केमिकल कॉरपोरेशन' नाम की कंपनी के मैनेजर थे, जिसने कथित तौर पर फर्जी बिल लगाए थे. उन्हें सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए 3 साल जेल और जुर्माने की सजा सुनाई थी.
मां का कनेक्शन
अभिषेक सिन्हा की मां चंचला सिन्हा को भी चारा घोटाले से जुड़े चायबासा ट्रेजरी मामले में अदालत ने 3 साल जेल और 80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. हालांकि, एक अन्य डोरंडा कोषागार मामले में अगस्त 2023 को सीबीआई की अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था.
चूंकि बीजेपी लगातार भ्रष्टाचार और चारा घोटाले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू प्रसाद यादव पर हमलावर रहती है, ऐसे में चारा घोटाले के दोषी के परिवार से आने वाले व्यक्ति को टिकट देने पर सोशल मीडिया और विपक्षी खेमे में सवाल उठने लगे थे. इसी डैमेज कंट्रोल के चलते पार्टी ने तुरंत उम्मीदवार बदलने का फैसला किया .
बूथ स्तर के कार्यकर्ता नीरज सिन्हा को मिला टिकट
अभिषेक सिन्हा के पीछे हटने के बाद बीजेपी ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए बूथ अध्यक्ष का काम कर रहे नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार घोषित किया है . टिकट मिलने की खबर जब नीरज को मिली, तब वे खुद बूथ पर मतदाताओं की पर्ची बांट रहे थे.
अचानक टिकट मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए नीरज सिन्हा ने कहा, "मैं तो बूथ लेवल का कार्यकर्ता हूं . कल्पना भी नहीं कर रहा था कि पार्टी मुझे इस जगह पर पहुंचाएगी . मैं बूथ अध्यक्ष के तौर पर पर्ची बांट रहा था, तभी अचानक फोन आया कि आपका नाम चल रहा है . मैं शीर्ष नेतृत्व का आभार जताता हूं ."
नए उम्मीदवार के बायोडाटा पर भी उठे सवाल
बीजेपी ने नए उम्मीदवार नीरज सिन्हा का जो बायोडाटा (Biodata) जारी किया, उसे लेकर भी विवाद खड़ा हो गया . बायोडाटा में लिखा गया था कि नीरज का जन्म 1994 में हुआ और उन्होंने 2006 में बीजेपी जॉइन की. इस हिसाब से महज 12 साल की उम्र में उनके पार्टी जॉइन करने पर जब सोशल मीडिया पर सवाल उठे, तो बीजेपी ने तुरंत एक संशोधित बायोडाटा जारी किया, जिसमें से उस विवादित लाइन को ही हटा दिया गया.
इस सीट पर प्रशांत किशोर की पार्टी (जन सुराज) जैसे मजबूत विकल्प भी सामने हैं, जिससे बांकीपुर की जंग काफी दिलचस्प हो गई है . अब देखना यह होगा कि बीजेपी का यह नया दांव कितना कारगर साबित होता है.
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