भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर CM सम्राट चौधरी ने तोड़ी चुप्पी, मंच से किया ये बड़ा ऐलान!

Samrat on Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. जनसभा के मंच से उन्होंने न्यायिक जांच का ऐलान करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी. जानिए भरत तिवारी एनकाउंटर केस में FIR, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई, SDPO को हटाने और परिजनों के आरोपों से जुड़ी पूरी कहानी.

Samrat on Bharat Tiwari Encounter
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आशीष अभिनव

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भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की सियासत में लगातार उबाल देखा जा रहा है. इस संवेदनशील मुद्दे पर लंबे समय से बनी चुप्पी को तोड़ते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक जनसभा के मंच से इस एनकाउंटर मामले पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है और इस पर तेज गति से काम चल रहा है. उन्होंने मंच से ऐलान किया कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई गलत है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि बिहार में 'सबका साथ सबका विकास' की संरचना के तहत ही न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है.

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जुडिशियल कमीशन का गठन और सीएम का बयान

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार राज्य में किसी भी गंभीर समस्या के सामने आने पर तुरंत चिंतित होकर कदम उठाती है. उन्होंने बताया कि भोजपुर की इस घटना के तुरंत बाद सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सबसे शीर्ष स्तर के जुडिशियल कमीशन (न्यायिक आयोग) का गठन कर दिया था.

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस कदम के पीछे का एकमात्र उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है. परिजनों के गंभीर आरोपों, स्थानीय लोगों के बढ़ते जन आक्रोश और सोशल मीडिया पर बन रहे भारी दबाव के बाद मुख्यमंत्री की तरफ से आया यह पहला सार्वजनिक बयान है.

अधिकारियों पर गिरी गाज, एसडीपीओ हटाए गए

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कड़े रुख के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है. सरकार के निर्देश पर जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है. उन्हें अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है.

प्रशासन ने उनकी जगह पंकज मिश्रा को जगदीशपुर का नया एसडीपीओ नियुक्त किया है. गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर के शाहपुर इलाके में पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी, जिसके बाद से ही पुलिस की थ्योरी पर लगातार सवाल उठ रहे थे.

मां के आवेदन पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा

इस पूरे मामले में मंगलवार को उस वक्त सबसे बड़ा मोड़ आया जब मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी के आवेदन पर पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस एफआईआर में जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है.

आशा देवी का आरोप है कि पुलिस टीम भरत तिवारी को जबरन अपने साथ जवनिया गांव लेकर गई थी, जहां भरत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए और हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण भी कर दिया था. परिवार का सीधा दावा है कि आत्मसमर्पण करने के बावजूद पुलिस ने उसे नहीं छोड़ा और घेरकर उसकी हत्या कर दी.

कौन थे भरत तिवारी और क्यों मचा है बवाल

इस कथित मुठभेड़ में जान गंवाने वाले 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बिलौटी गांव के निवासी थे. स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी एक खास पहचान थी. ग्रामीणों के मुताबिक, भरत तिवारी इलाके में सड़क, बिजली और पैदल चलने वाले बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं के साथ-साथ उनके पुनर्वास को लेकर लगातार प्रखरता से आवाज उठाते थे. एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखने वाले युवक के इस तरह एनकाउंटर में मारे जाने के बाद से ही पूरे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है और सोशल मीडिया पर भी न्याय की मांग को लेकर अभियान चल रहा है. अब मुख्यमंत्री के बयान और न्यायिक जांच की घोषणा के बाद देखना होगा कि इस मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं.

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