भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग ने आखिरकार अपना काम शुरू कर दिया है. पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा ने मीडिया से बात करते हुए जांच में हुई देरी की एक बेहद गंभीर और बड़ी वजह का खुलासा किया है. आयोग के अध्यक्ष ने सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करते हुए बताया कि आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर समय पर उपलब्ध न होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में देरी हुई है.
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इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण जांच में हुई देरी
न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा ने साफ किया है कि आयोग की तरफ से काम में कोई ढिलाई नहीं थी, बल्कि सरकार और प्रशासन द्वारा जरूरी संसाधन देरी से उपलब्ध कराए गए. एक स्वतंत्र जांच आयोग को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम एक दफ्तर, बैठने के लिए कुर्सियां और जरूरी स्टाफ की आवश्यकता होती है. यह सब मुहैया कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार और स्थानीय प्रशासन की थी, लेकिन इसे समय पर उपलब्ध नहीं कराया जा सका. इस प्रशासनिक शिथिलता की वजह से पूरी जांच प्रक्रिया करीब दो से तीन हफ्ते तक लटकी रही.
कागजों से निकलकर जमीन पर आया आयोग का दफ्तर
बिहार के आरा में हुई इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश था, जिसके मद्देनजर 20 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच की घोषणा की थी. इसके बाद 24 जून को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के साथ ही पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज विनोद कुमार सिन्हा को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. वह अगले ही दिन यानी 25 जून को पीड़ित परिवार से मिलने बिलौटी गांव भी गए थे, लेकिन उसके बाद से आयोग के दफ्तर और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर कोई सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आ रही थी. अब करीब 12-13 दिनों के लंबे इंतजार के बाद 8 जुलाई को आरा के एजुकेशन ऑफिस कैंपस की एक नई बिल्डिंग में इस आयोग का दफ्तर शुरू हो पाया है.
अगले दो-तीन दिनों में समन जारी करने की तैयारी
दफ्तर मिलने के बाद अब आयोग अपनी कार्रवाई को तेज करने की तैयारी में है. आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक, आने वाले दो से तीन दिनों में इस मामले से जुड़े लोगों को समन जारी किया जाएगा. इसमें घटना के वक्त मौजूद पुलिसकर्मी और पीड़ित परिवार के लोग शामिल हैं. आयोग जल्द ही अखबारों में विज्ञापन भी जारी करेगा ताकि जनता या किसी चश्मदीद के पास यदि इस कथित एनकाउंटर से जुड़ा कोई सबूत या साक्ष्य हो, तो वह सीधे आयोग के सामने आकर उसे पेश कर सके.
कोर्ट की समानांतर कार्रवाई और पीड़ित परिवार का रुख
इस पूरे मामले में एक तरफ जहां न्यायिक जांच आयोग ने अपनी गतिविधि शुरू की है, वहीं दूसरी तरफ कानूनी कोर्ट की कार्रवाई भी जारी है. भरत तिवारी की मां द्वारा पांच पुलिसकर्मियों पर दर्ज कराई गई हत्या की एफआईआर पर आरा सिविल कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जहां पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. कोर्ट की इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैलेस्टिक रिपोर्ट और घटनास्थल के दस्तावेजीकरण से जुड़े अहम सबूत कोर्ट के सामने पेश करने होंगे, जिससे कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. वहीं, अपनी सेहत खराब होने के कारण भरत तिवारी की मां का आमरण अनशन अब 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है.
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