जल ही जीवन का आधार है, लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल संकट ने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है. ऐसे संकट के समय में बिहार के भोजपुर जिले का एक छोटा सा गांव जल संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है. जिले के बिहिया प्रखंड स्थित फिंगी गांव में घरों से निकलने वाले गंदे पानी (अपशिष्ट जल) को वैज्ञानिक तरीके से साफ कर खेती के लायक बनाया जा रहा है. जिस गंदे पानी से कभी गांव में जलजमाव, बदबू और बीमारियों का डर बना रहता था, वही पानी अब फसलों को सींचने के काम आ रहा है.
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क्या है यह ABR-AF तकनीक?
गांव में जल शोधन के लिए ABR-AF (एनारोबिक बैफल्ड रिएक्टर एंड एनारोबिक फ़िल्टर) तकनीक पर आधारित ग्रे वाटर मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है. इस प्रक्रिया के तहत:
- गांव के करीब 200 घरों से निकलने वाले गंदे पानी को 100 फीट लंबीRCC नाली के जरिए मुख्य ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है.
- वहां 41 फीट लंबे और 16 फीट चौड़े एक खास ढांचे में पानी को कई चरणों से होकर गुजारा जाता है.
- इस पूरे ढांचे में 6 विशेष फिल्टर, इनलेट और आउटलेट चैंबर बनाए गए हैं.
- आउटलेट चैंबर में ग्रेवल (गिट्टी/कंकड़) की परतें बिछाई गई हैं, जो पानी को पूरी तरह छानकर साफ कर देती हैं.
14.57 लाख रुपये की लागत से बदली गांव की सूरत
भोजपुर के जिला सलाहकार (CB & IES) रौशन कुमार के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को बनाने में लगभग 14 लाख 57 हजार रुपये की लागत आई है. इसे स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और माइनिंग विभाग के संयुक्त सहयोग से तैयार किया गया है. इस सिस्टम के लगने से अब गांव में जलजमाव की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई है और किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त व प्रचुर मात्रा में शोधित पानी मिल रहा है.
बदलते बिहार की नई पहचान
फिंगी गांव का यह प्रयोग यह साबित करता है कि अगर सही तकनीक और इच्छाशक्ति हो, तो वेस्ट वाटर को भी एक बहुमूल्य संसाधन में बदला जा सकता है. जल संकट से निपटने और सतत विकास की दिशा में फिंगी गांव का यह मॉडल पूरे बिहार के अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभर रहा है.
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