भागलपुर में भड़भड़ाकर गिरा 200 करोड़ में तैयार हुआ विक्रमशिला सेतु, बाल-बाल बचीं सैकड़ों जानें, सिस्टम की सुस्ती या कुछ और?

भागलपुर में विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा टल गया. जहां अधिकारियों की सतर्कता ने समय रहते लोगों को हटाकर उनकी जान बचा ली. फिलहाल सुरक्षा कारणों से पुल को सील कर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है और लोगों को मुंगेर के रास्ते जाने की सलाह दी गई है.

भागलपुर न्यूज
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रोहित कुमार सिंह

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बिहार के भागलपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां गंगा नदी पर बना प्रसिद्ध विक्रमशिला सेतु एक बड़े हादसे का गवाह बनते-बनते रह गया. शनिवार रात पुल का एक बड़ा हिस्सा (स्लैब) अचानक टूटकर सीधे गंगा नदी में जा गिरा. गनीमत यह रही कि इस मंजर के हकीकत बनने से महज 15 मिनट पहले प्रशासन ने अपनी तत्परता दिखाते हुए पुल को खाली करा लिया था, वरना एक बड़ी जनहानि तय थी.

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15 मिनट की वो लाइफ-सेविंग मुस्तैदी

जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि यह सब स्थानीय अधिकारियों और इलाके के SHO की सजगता की वजह से मुमकिन हो पाया. पुल के हिस्से में दरार और हलचल देखते ही पुलिस ने मोर्चा संभाला और आनन-फानन में वहां मौजूद लोगों और वाहनों को हटाना शुरू कर दिया.

"प्रशासन की फुर्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही आखिरी शख्स को सुरक्षित दूरी पर ले जाया गया, उसके ठीक 15 मिनट बाद पुल का भारी-भरकम स्लैब ताश के पत्तों की तरह ढहकर नदी में गिर गया."

 भागलपुर-नवगछिया रूट पूरी तरह सील

हादसे के तुरंत बाद एक्शन लेते हुए प्रशासन ने विक्रमशिला सेतु को भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ से बैरिकेडिंग कर पूरी तरह सील कर दिया है. सुरक्षा के मद्देनजर फिलहाल पुल पर पैदल आवाजाही भी रोक दी गई है. रात का समय होने के कारण तत्काल कोई वैकल्पिक छोटा रास्ता खोलना संभव नहीं था, इसलिए प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी.

25 साल में ही जवाब दे गया 200 करोड़ का ढांचा

साल 2001 में करीब 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ यह 4.5 किलोमीटर लंबा पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली लाइफलाइन माना जाता था. रोजाना हजारों गाड़ियां और लाखों लोग इस पर निर्भर थे. लेकिन महज 25 साल के भीतर ही पुल के ढहने ने निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

अब क्या है यात्रियों के लिए विकल्प?

पुल बंद होने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. प्रशासन ने लोगों को धैर्य रखने की सलाह दी है और वैकल्पिक रास्ते के तौर पर मुंगेर ब्रिज का इस्तेमाल करने को कहा है. भागलपुर आने-जाने के लिए अब यात्रियों को मुंगेर होकर जाना होगा. मुंगेर ब्रिज करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर है. इस बदलाव से यात्रियों के समय और जेब (ईंधन खर्च) दोनों पर भारी बोझ पड़ने वाला है.

फिलहाल, तकनीकी टीम पुल की जांच में जुटी है, लेकिन जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, भागलपुर की इस मुख्य सड़क पर सन्नाटा पसरा रहेगा. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जोखिम न उठाएं और मुंगेर वाले रास्ते का ही प्रयोग करें.

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