भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी SDPO को मिली नई पोस्टिंग, फैसले से बिहार में छिड़ा नया बवाल

Bharat Tiwari Encounter Controversy: बिहार के भोजपुर में हुए चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आ गया है. मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को बिहार सरकार ने नई पोस्टिंग दे दी है. इस फैसले के बाद राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद छिड़ गया है.

भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी SDPO को नई पोस्टिंग
भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी SDPO को नई पोस्टिंग

शशि भूषण कुमार

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Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है. इसी बीच राज्य सरकार ने एक ऐसा प्रशासनिक फैसला लिया है जिसने विवाद को और अधिक बढ़ा दिया है. इस एनकाउंटर मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा को बिहार सरकार ने एक नई पोस्टिंग सौंप दी है. सरकार के इस कदम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है और शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.

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मुख्यालय से हटाकर मद्य निषेध विभाग में मिली तैनाती

भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद जब विवाद बहुत अधिक बढ़ गया और चौतरफा दबाव बनने लगा तब प्रशासन ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए SDPO राजेश कुमार शर्मा को जगदीशपुर से हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया था. लेकिन अब बिहार पुलिस द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के अनुसार, राजेश कुमार शर्मा की तैनाती मद्य निषेध विभाग में कर दी गई है. इस नई पोस्टिंग के आदेश के बाद पीड़ित परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है.

क्या था बिलौटी गांव का पूरा एनकाउंटर मामला?

यह पूरा मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का है. यहां के निवासी भरत भूषण तिवारी की बीती 17 जून को पुलिस एनकाउंटर के दौरान मौत हो गई थी. पुलिस प्रशासन का दावा था कि पुलिस टीम ने अपनी और आम लोगों की सुरक्षा में आत्मरक्षा के तहत गोली चलाई थी, जो भरत तिवारी के पैर में लगी थी. इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई. पुलिस ने इसे पूरी तरह से आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया था, लेकिन हाल ही में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के दावों को संदिग्ध बना दिया है, क्योंकि रिपोर्ट में मृतक को पांच गोलियां लगने की बात कही जा रही है.

पीड़ित परिवार की मांग: पैकेज नहीं, सीधे सीबीआई जांच हो

दूसरी तरफ, मृतक भरत तिवारी के परिवार और बिलौटी गांव के लोगों में अब भी गहरा गुस्सा है. परिजनों ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें सरकार से किसी भी प्रकार का आर्थिक पैकेज, मुआवजा या राजनीतिक आश्वासन नहीं चाहिए. उनकी एकमात्र मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की है. परिवार ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, इसलिए इस पूरे मामले की सीधे CBI से जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके.

सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो हुआ था वायरल

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के इतनी तेजी से तूल पकड़ने के पीछे एक बड़ा कारण सोशल मीडिया भी है. घटना से ठीक पहले भरत तिवारी अपने क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को उठा रहे थे और उन्होंने पुलिस प्रशासन के साथ हुई भिड़ंत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बकायदा लाइव करके डाला था. एनकाउंटर के बाद यह लाइव वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने शासन से लेकर प्रशासन तक को गंभीर सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब आरोपी अधिकारी को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी और राजनीतिक मोड़ आता है.

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