बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हैं. फिलहाल सरकार एक मुख्यमंत्री और दो उप-मुख्यमंत्रियों के भरोसे चल रही है, लेकिन अंदरखाने कैबिनेट विस्तार की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है. सूत्रों के मुताबिक, सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं और कई पुराने चेहरों की छुट्टी तय मानी जा रही है.
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क्यों रुका था कैबिनेट विस्तार?
वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कैबिनेट विस्तार न होने के पीछे तीन मुख्य कारण थे:
नीतीश कुमार की विदाई: नीतीश कुमार की विदाई के समय भव्य कार्यक्रम न करके सेंटीमेंट्स को आहत होने से बचाया गया.
नेताओं की व्यस्तता: बीजेपी के शीर्ष नेता दूसरे राज्यों (विशेषकर पश्चिम बंगाल) के चुनाव प्रचार में व्यस्त थे.
ब्रांडिंग और रणनीति: ट्रांजिशन फेज में पहले मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग पर जोर दिया गया, ताकि बाद में समीकरणों को साधा जा सके.
5 मई के बाद होगा विस्तार: क्या है नया फॉर्मूला?
बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार 5 मई के बाद कभी भी हो सकता है. सरकार में कुल 36 मंत्री बन सकते हैं, जिनमें से 32 से 34 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है.
जेडीयू का फॉर्मूला: जेडीयू में करीब 30% नए चेहरों की एंट्री हो सकती है, यानी 4 से 5 पुराने मंत्रियों को बदला जा सकता है.
बीजेपी का फॉर्मूला: बीजेपी में 40% नए चेहरों को जगह मिल सकती है. करीब 6 से 7 कद्दावर नेताओं या पुराने मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मौका मिलेगा.
सहयोगी दल: चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) से दो मंत्री, जीतन राम मांझी की पार्टी (HAM) से एक और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (RLM) से एक मंत्री बनने की संभावना है.
इन चेहरों पर है नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन और दीपक प्रकाश का नाम लगभग फाइनल माना जा रहा है. वहीं, सम्राट चौधरी पर यह दबाव भी है कि वह अपनी टीम में ऐसी सोशल इंजीनियरिंग करें जो नीतीश कुमार के मॉडल से आगे निकले.
पोर्टफोलियो में होगा फेरबदल
सम्राट चौधरी केवल मंत्रियों के नाम ही नहीं, बल्कि उनके विभागों (Portfolios) में भी बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में हैं. वह अपनी एक ऐसी 'कोर टीम' बनाना चाहते हैं जो उनके विजन को धरातल पर उतार सके और बिहार को एक नई दिशा दे सके.
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