बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने विभागीय कामकाज में सुधार और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार के इस नए आदेश ने उन हजारों कर्मचारियों के बीच हलचल मचा दी है, जो सरकारी सेवा में रहते हुए अपनी योग्यता सुधारने या उच्च पदों पर जाने के लिए बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते थे. 6 अप्रैल 2026 से लागू हुए इस नए नियम के तहत, अब कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान केवल एक बार ही किसी प्रतियोगी परीक्षा में बैठने की अनुमति ले सकेंगे. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
सरकार द्वारा जारी इस आदेश के पीछे का मुख्य कारण विभागीय कार्यों में आने वाली बाधाओं को बताया गया है. विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त रहते हैं. इसके चलते वे बार-बार परीक्षा में शामिल होने के लिए विभाग से अनुमति मांगते हैं, जिससे उनके प्राथमिक सरकारी कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. सरकार का मानना है कि जब किसी कर्मचारी को वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, तो बार-बार परीक्षाओं की अनुमति मांगना लोकहित के खिलाफ है और इससे सरकारी कामकाज की गति धीमी हो जाती है.
सिर्फ एक मौका, वरना देना होगा इस्तीफा
नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई कर्मचारी अपने वर्तमान पद से किसी ऊंचे पद पर जाने की इच्छा रखता है, तो उसे पूरी नौकरी के दौरान केवल एक ही अवसर दिया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि बार-बार प्रयास करने का विकल्प अब पूरी तरह समाप्त हो गया है. यदि कोई कर्मचारी एक बार के अवसर के बाद भी अन्य परीक्षाओं में शामिल होना चाहता है, तो उसे पहले अपनी वर्तमान सरकारी सेवा से अनिवार्य रूप से त्यागपत्र (Resignation) देना होगा. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नौकरी में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का रास्ता अब बंद हो चुका है.
करियर ग्रोथ पर पड़ेगा बड़ा असर
विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल सकता है. एक तरफ जहां इससे विभाग में स्थिरता आएगी और कर्मचारी अपने काम पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर पाएंगे, वहीं दूसरी तरफ यह कर्मचारियों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों को सीमित कर सकता है. बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जो सेवा में रहते हुए यूपीएससी (UPSC) या बीपीएससी (BPSC) जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे युवाओं के लिए अब यह नया नियम एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है.
विभाग ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस आदेश को सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के साथ तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है. इसकी प्रतिलिपि सभी संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को भेज दी गई है ताकि नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके. विभाग ने यह संकेत भी दिए हैं कि यदि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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