बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद लगातार चर्चाएं हो रही थी कि अब जदयू की कमान किसके हाथ में जाएगी. इसी बीच नीतीश कुमार ने जदयू के विधायक दल के नेता के लिए श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी है. अब श्रवण कुमार जदयू के विधायक दल के नेता होंगे और सारे महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भागीदारी होगी. बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने जदयू की बैठक में उनका नाम अधिकृत किया था और अब विधानसभा सचिवालय को इसकी जानकारी दी गई है.
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रविवार को हुई थी बैठक
दरअसल रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर जदयू विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें विधायक दल ने नेता के चयन पर चर्चा की गई. विधायकों ने पहले ही श्रवण कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिस पर अब पार्टी नेतृत्व ने भी अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है.
कौन है श्रवण कुमार?
श्रवण कुमार बिहार की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम है और नीतीश के करीबी नेताओं में से एक है. श्रवण कुमार पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जनपद नालंदा से ही आते है और वे भी कुर्मी समाज के एक बड़े चेहरा है. राजनीतिक सफर की बात करें तो श्रवण कुमार पिछले पांच दशक से राजनीति में सक्रिय है. सन 1974 के जेपी आंदोलन से ही उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हो गई थी, जिसमें नीतीश कुमार एक मुख्य चेहरा थे. यहीं से दोनों के रिश्ते काफी मजबूत हुए जो आज भी बरकरार है.
श्रवण कुमार सन 1995 से नालंदा सीट से लगातार विधायकी का चुनाव जीतते हुए आए है. साथ ही वे बिहार सरकार के प्रमुख विभाग जैसे ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य जैसे मंत्रालय भी संभाल चुके है. जब-जब नीतीश कुमार को पार्टी मजबूत करने की जरूरत पड़ी है श्रवण कुमार एक चट्टान की तरह खड़े रहे और उन्होंने नीतीश का समर्थन किया है.
नीतीश कुमार ने साध लिया बड़ा दांव
अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात की हो रही है कि नीतीश कुमार ने आखिर इन्हें ही क्यों विधायक दल का नेता बनाया है? तो इसका जवाब है नीतीश कुमार की पारंपरिक राजनीति, जहां वे संतुलन बनाए रखते हैं. नीतीश कुमार खुद कुर्मी समाज से आते है, जो की जदयू का कोर वोटबैंक माना जाता है. साथ ही नीतीश कुमार ने कुर्मी वोटबैंक के बदौलत ही दो दशक तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहे है, लेकिन अब दिल्ली जा रहे है.
ऐसे में उन्होंने जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम तो बनाया लेकिन उसमें एक भूमिहार जाति से है और दूसरा यादव समुदाय से. ऐसे स्थिति में कुर्मी समाज का भरोसा कायम रखने के लिए नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगाकर दांव खेला है, ताकि उनका कोर वोटबैंक कहीं नहीं बिखरे. साथ ही नीतीश कुमार के करीबी होने की वजह से कमान नीतीश के हाथ में भी रहेगी.
तीन दिन पहले दी गई Y+ सुरक्षा
गौरतलब है कि तीन दिन पहले ही बिहार सरकार ने पूर्व मंत्री श्रवण कुमार की सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है. सुरक्षा व्यवस्था में यह विस्तार अप्रैल 2026 में राज्य सरकार द्वारा किए गए हालिया बदलावों के तहत किया गया है.
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