पटना के चर्चित कोचिंग विवाद के बाद अब मशहूर शिक्षक खान सर की मुश्किलें उनके गृह राज्य उत्तर प्रदेश में भी बढ़ती दिख रही हैं. पटना पुलिस की एफआईआर और गिरफ्तारी की तलवार के बीच, जब इस पूरे मामले की गूंज यूपी के देवरिया जिले में उनके पैतृक इलाके तक पहुंची, तो वहां से खान सर को लेकर बेहद चौंकाने वाले और तीखे बयान सामने आए हैं. कुछ पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि खान सर के साथ 'अब बिल्कुल सही हो रहा है.'
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देवरिया के भाटपार रानी पहुंचे तो खुला आरोपों का पिटारा
पटना में खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच हुई फायरिंग के बाद खान सर लगातार सुर्खियों में हैं. इस विवाद पर जमीनी हकीकत और लोगों का मूड जानने के लिए जब टीम देवरिया के भाटपार रानी पहुंची- जिसे खान सर का पैतृक गांव या मूल निवास स्थान माना जाता है- तो वहां का माहौल पटना से बिल्कुल अलग नजर आया. यहां लोगों के दिलों में खान सर को लेकर काफी नाराजगी और गुस्सा भरा हुआ है.
खान सर नहीं, इनका नाम अभिमान सर होना चाहिए
इलाके के स्थानीय सभासद आदित्य सिंह मोनू ने खान सर के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इलाके में खान सर का अच्छा-खासा रसूख और दबदबा है, लेकिन वे इसका गलत इस्तेमाल करते हैं. सभासद ने तंज कसते हुए कहा, "उनका नाम खान सर नहीं, बल्कि 'अभिमान सर' होना चाहिए."
मोनू ने एक वाकया साझा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ समय पहले नगर पंचायत उनके घर के सामने नाली का निर्माण करवा रही थी, जिसका खान सर ने कड़ा विरोध किया. खान सर का रसूख ऐसा है कि उनके महज एक फोन कॉल पर प्रशासनिक अधिकारी काम रुकवाने के लिए मौके पर दौड़ते चले आए.
मेरी बाउंड्री तुड़वा दी थी
खान सर के एक पड़ोसी अशोक सिंह का दर्द तो सीधे तौर पर छलक पड़ा. उन्होंने खान सर पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सर ने इलाके में जो जमीन खरीदी थी, उसके रास्ते को लेकर करीब दो साल तक मोहल्ले में विवाद चलता रहा. इस रास्ते के चक्कर में पूरे मोहल्ले के लोग परेशान रहे.
अशोक सिंह ने गुस्से में कहा, "रास्ते के विवाद के चलते उन्होंने मेरी बाउंड्री तक तुड़वा दी थी. आज उनके खिलाफ जो भी कानूनी कार्रवाई या एफआईआर हो रही है, वह बिल्कुल सही है. उनके कर्मों का फल उन्हें मिल रहा है."
कोचिंग से निकलकर सामाजिक बहस बना मामला
हालांकि, इन स्थानीय आरोपों पर अभी तक खान सर या उनकी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक सफाई या बयान सामने नहीं आया है और न ही इन दावों की पूरी तरह से स्वतंत्र पुष्टि हो सकी है. लेकिन एक बात साफ है कि पटना से शुरू हुआ यह कोचिंग सेंटर्स का आपसी विवाद अब सिर्फ कानून की चौखट तक सीमित नहीं रह गया है. यह अब खान सर के पैतृक गांव की गलियों, सामाजिक रिश्तों और स्थानीय राजनीति में एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है.
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