बिहार की राजनीति में आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. इसी बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी एमएलसी चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की पूरी तैयारी में है. प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत करते हुए चुनावी रणनीति से लेकर प्रदेश के सुलगते मुद्दों, जैसे बाढ़ का संकट और बिहार के छात्रों का आंदोलन पर खुलकर अपनी बात रखी. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी बात.
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सभी 8 सीटों पर चुनाव लड़ने की मंशा
MLC चुनाव में पार्टी की हिस्सेदारी और तैयारी पर सवाल पूछे जाने पर प्रशांत किशोर ने कहा कि संविधान के नियमानुसार जहां भी चुनाव होंगे, राजनीतिक दल होने के नाते जन सुराज उसमें भाग लेगी. प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज राज्य की सभी 8 एमएलसी सीटों पर चुनाव लड़ने की मंशा रखती है. उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले 5 से 7 दिनों के भीतर पार्टी के उम्मीदवारों के नाम तय कर घोषित कर दिए जाएंगे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाम सामने आने के बाद ही मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक इस बात का आकलन या विवेचना करें कि किसकी जमानत बचेगी और कौन चुनाव जीतेगा या हारेगा.
बाढ़ संकट पर सरकार पर साधा निशाना
बिहार में मंडरा रहे बाढ़ के खतरे और नेपाल में हो रही मौतों को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि बिहार में हर साल बाढ़ आना कोई नई खबर नहीं है, यह वैसे ही हो गया है जैसे रोज पूर्व में सूरज का उगना. सरकार हर बार बाढ़ के नाम पर केवल लीपापोती करती है और अगले साल फिर वही स्थिति बनकर खड़ी हो जाती है. प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले 4 सालों से वे जनता के बीच में हैं और उन्होंने देखा है कि बाढ़ से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
छात्र आंदोलन और TRE-4 की मांग पर सरकार को घेरा
बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने सरकार के रवैये की कड़े शब्दों में आलोचना की. उन्होंने कहा कि एक तरफ छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं और दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री गृह प्रवेश और भोज के कार्यक्रमों में व्यस्त हैं. प्रशांत किशोर ने मांग उठाई कि सरकार ने 25 लाख नौकरियों का जो वादा किया था, उसके तहत टीआरई-4 (TRE 4) की परीक्षा तुरंत कराई जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में लगाए गए नए नियमों, जिनका छात्र लगातार विरोध कर रहे हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और छात्रों की जायज मांगों को सरकार को तुरंत स्वीकार करना चाहिए.
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