बिहार की राजनीति में इन दिनों तरह–तरह की चर्चाएं गर्म हैं. इसी बीच मशहूर शिक्षक और ‘अभिनय मैथ्स’ के नाम से पहचान बनाने वाले अभिनय शर्मा ने तेजस्वी यादव को लेकर बड़ा बयान दिया है. बिहार Tak से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि अब बिहार में लोगों को “जंगलराज” का डर दिखाना बेकार है, क्योंकि राज्य और समाज दोनों ही पूरी तरह बदल चुके हैं.
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आज का बिहार 2005 वाला नहीं रहा
अभिनय सर का मानना है कि लोग बार-बार 15-20 साल पुराने दौर से आज की तुलना करते हैं, जो सही नहीं है. उनके मुताबिक उस वक्त मीडिया और सोशल मीडिया की ताकत इतनी नहीं थी. आज हालात ये हैं कि हर किसी के हाथ में मोबाइल है, खबर मिनटों में वायरल हो जाती है और अगर कहीं कुछ गलत होता है तो जनता तुरंत आवाज उठाती है. ऐसे माहौल में किसी भी नेता की इतनी हिम्मत नहीं कि वह बिहार में फिर से अराजकता फैला दे.
तेजस्वी को मौका मिलना चाहिए था?
सत्ता विरोधी माहौल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर बिहार की जनता बदलाव चाहती थी तो तेजस्वी यादव को मौका मिलने में कोई बुराई नहीं थी. अभिनय शर्मा ने यह भी जोड़ा कि ये मान लेना गलत है कि तेजस्वी अकेले ही सब कुछ मनमाने ढंग से चला लेते. केंद्र में भाजपा की सरकार और आसपास के राज्यों में भी वही पार्टी सत्ता में है, ऐसे में बिहार में कोई भी सरकार पूरी तरह निरंकुश नहीं हो सकती.
वंशवाद पर खरी-खरी
अभिनय सर यहीं नहीं रुके. उन्होंने राजद और कांग्रेस जैसी पार्टियों को अंदरूनी सुधार की सलाह भी दे डाली.
उन्होंने कोटा की मशहूर बंसल क्लासेस का उदाहरण देते हुए समझाया कि जब संस्थान या पार्टी में सिर्फ परिवार के लोगों को आगे बढ़ाया जाता है और काबिल लोगों को पीछे रखा जाता है, तो संगठन धीरे–धीरे कमजोर पड़ने लगता है.
उनका मानना है कि तेजस्वी यादव को चाहिए कि वे अपने साथ-साथ पार्टी के दूसरे प्रतिभाशाली विधायकों और नेताओं को भी आगे बढ़ने का मौका दें, ताकि पार्टी में नई ऊर्जा आ सके.
प्रशांत किशोर पर भी टिप्पणी
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर भी अभिनय शर्मा ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि पीके एक मजबूत फैक्टर बन सकते थे, लेकिन शायद उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने की जल्दबाजी कर दी. अगर वे गठबंधन की राजनीति पर ज्यादा फोकस करते और अकेले उतरने के बजाय किसी बड़े मोर्चे का हिस्सा बनते, तो नतीजे कुछ और हो सकते थे.
कुल मिलाकर संदेश साफ
अभिनय शर्मा का पूरा बयान यही इशारा करता है कि बिहार की राजनीति अब पुराने डर और नारों से आगे निकल चुकी है. जनता जागरूक है, सिस्टम पर नजर रखती है और किसी को भी मनमानी की छूट नहीं देने वाली. ऐसे में “जंगलराज” जैसे शब्दों से लोगों को डराने की राजनीति अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाली.
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