बिहार की राजनीति में शनिवार सुबह उस वक्त हलचल मच गई, जब सांसद पप्पू यादव को पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) लाया गया. गिरफ्तारी के दौरान लगी चोट के कारण उनके सिर में तेज दर्द बताया जा रहा है, वहीं धड़कन बढ़ने की शिकायत के चलते डॉक्टरों ने उनकी जांच की.
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इससे पहले देर रात उन्हें इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) भी हेल्थ चेकअप के लिए ले जाया गया था. डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
समर्थकों का विरोध
पप्पू यादव की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए और विरोध शुरू कर दिया. माहौल को देखते हुए पुलिस भी सतर्क नजर आई.
इसी बीच उनके भाई राजेश यादव ने कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली, वे तुरंत भाई के पास पहुंचे. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पप्पू यादव के खिलाफ वारंट था, तो वह चुनाव के दौरान खुले तौर पर कैसे घूम रहे थे. उनका यह भी कहना है कि पप्पू यादव हाल ही में NEET मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहे थे और उसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया.
मुझे नहीं पता मेरा क्या होगा
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने अनिश्चितता जताते हुए कहा, “मुझे नहीं पता मेरा क्या होगा.” उनका यह बयान मामले की गंभीरता को दिखाता है.
1995 का मामला क्या है?
यह पूरा मामला गर्दनीबाग थाने में दर्ज एक पुराने केस से जुड़ा है. शिकायत मकान मालिक विनोद बिहारी लाल ने की थी. आरोप है कि पप्पू यादव ने निजी इस्तेमाल के नाम पर मकान किराए पर लिया, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक दफ्तर बना दिया.
जब मकान मालिक को इसकी जानकारी हुई तो विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद पप्पू यादव पर धोखाधड़ी, जालसाजी, घर में जबरन घुसने, आपराधिक धमकी और साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए.
यह केस MP-MLA की विशेष अदालत में चल रहा था, लेकिन बताया जाता है कि सांसद कई बार कोर्ट में पेश नहीं हुए. आखिरकार अदालत ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की. फिलहाल पप्पू यादव का इलाज जारी है और उनकी गिरफ्तारी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर और गर्माने की संभावना है.
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