बिहार की राजनीति में इस वक्त एक ऐसी खामोशी छाई है, जो किसी बड़े तूफान का संकेत दे रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का बाजार गर्म कर दिया है. इस वीडियो में नीतीश कुमार जिस तरह से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आगे करते दिख रहे हैं, उसे उनके 'उत्तराधिकारी' के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
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नीतीश कुमार का वो एक इशारा और शुरू हुआ बवाल
हाल ही में नीतीश कुमार अपनी 'महत्वाकांक्षी समृद्धि यात्रा' के दौरान एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. मंच पर भाषण देते-देते नीतीश कुमार अचानक रुके और पास ही खड़े उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कंधा थाम लिया. उन्होंने इशारे से सम्राट चौधरी को जनता का अभिवादन करने के लिए आगे किया. इस पल को कैमरों ने कैद कर लिया और देखते ही देखते यह वीडियो चर्चा का विषय बन गया. राजनीतिक विश्लेषक इसे नीतीश कुमार द्वारा सार्वजनिक मंच से अपना 'वारिस' चुनने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं.
क्या नीतीश कुमार जा रहे हैं दिल्ली?
बिहार की राजनीति में चर्चा जोरों पर है कि नीतीश कुमार जल्द ही पटना के '1 अणे मार्ग' (मुख्यमंत्री आवास) को छोड़कर दिल्ली की राह पकड़ सकते हैं. 16 मार्च को होने वाली वोटिंग के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी खाली होने वाली कुर्सी पर कौन बैठेगा?
रेस में सबसे आगे क्यों हैं सम्राट चौधरी?
सम्राट चौधरी फिलहाल बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं. उनकी दावेदारी मजबूत होने के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
1. बीजेपी में वरिष्ठता: वे राज्य में बीजेपी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हैं.
2. कुर्मी समाज पर पकड़: नीतीश कुमार खुद कुर्मी समाज से आते हैं और बिहार की राजनीति में यह वोट बैंक बेहद निर्णायक रहा है. सम्राट चौधरी की इस समाज में मजबूत पैठ उन्हें नीतीश का स्वाभाविक विकल्प बनाती है.
3. प्रशासनिक अनुभव: उपमुख्यमंत्री के तौर पर उनका हालिया कामकाज भी उन्हें इस रेस में आगे रखता है.
क्या होगा जेडीयू का रुख?
हालांकि सम्राट चौधरी बीजेपी से हैं और नीतीश कुमार जेडीयू के सर्वमान्य नेता रहे हैं. ऐसे में जेडीयू के भीतर इस बदलाव को लेकर क्या प्रतिक्रिया होगी, यह देखने वाली बात होगी. क्या नीतीश कुमार अपनी पार्टी की कमान और राज्य की सत्ता पूरी तरह बीजेपी के हाथों में सौंपने को तैयार हैं? यह सवाल फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है.
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