बिहार की राजनीति में इन दिनों समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है. पिछले 48 घंटों के भीतर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो बार यह ऑफर दिया गया है कि वे एनडीए का साथ छोड़कर एक बार फिर महागठबंधन के पाले में आ जाएं. हालांकि, इस सियासी हलचल के पीछे सिर्फ इतना भर मामला नहीं है कि एक दल ने न्योता दिया और दूसरे दल ने उसे स्वीकार कर लिया हो, बल्कि इसके केंद्र में यूसीसी को लेकर जेडीयू का अपना एक अलग स्टैंड और नीति है.
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जेडीयू का कहना है कि वे इस कानून के प्रारूप को अच्छी तरह से देखेंगे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे, जिसके बाद ही पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक राय सामने रखी जाएगी. हालांकि, इस शुरुआती बयान के बाद पार्टी लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है, लेकिन आरजेडी के लगातार दो दिनों में दिए गए बयानों ने सूबे की सियासत में एक मनोवैज्ञानिक दबाव जरूर बना दिया है.
भाई वीरेंद्र का तीखा हमला और महागठबंधन में आने का न्योता
आरजेडी के विधायक और लालू यादव के करीबी माने जाने वाले भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार को लेकर तीखा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और यह कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है, जो नागपुर से गाइड हो. उन्होंने दावा किया कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने दिया जाएगा और नीतीश कुमार भी इस पर पहले स्टैंड ले चुके हैं.
भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए कहा कि वे ऐसे लोगों का साथ छोड़ें और महागठबंधन में आकर मिलकर सरकार बनाएं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि वे बीजेपी को छोड़कर आएं और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ हाथ मिलाएं. उनका यह भी तर्क रहा है कि चूंकि नीतीश कुमार समाजवादी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए उन्हें अब बीजेपी का साथ छोड़कर सामाजिक न्याय की धारा में वापस लौट आना चाहिए.
जेडीयू ने आरजेडी के प्रस्ताव को बताया 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने'
आरजेडी की तरफ से मिल रहे लगातार न्योतों पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने आरजेडी के इस प्रस्ताव को कोरी कल्पना और 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' करार दिया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बेगाने शादी में अब्दुल्ला दीवाना वाली स्थिति है, क्योंकि आरजेडी नेताओं को न तो जनता पूछ रही है और न ही कोई दल उन्हें घास डालने को तैयार है.
जेडीयू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरजेडी को किसी भी तरह की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए, क्योंकि जेडीयू का आरजेडी के साथ भविष्य में कोई रिश्ता नहीं हो सकता. पार्टी का यह भी कहना है कि जेडीयू अपनी राय और विचार स्वतंत्र रूप से रखने के लिए जानी जाती है और वे पूरी मजबूती के साथ एनडीए का हिस्सा हैं और आगे भी बने रहेंगे.
क्या सचमुच बन रहे हैं बिहार में सत्ता परिवर्तन के समीकरण?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि चूंकि अतीत में नीतीश कुमार दो बार पाला बदलकर आरजेडी के साथ सरकार बना चुके हैं, इसलिए यदि यूसीसी के मुद्दे पर बीजेपी और जेडीयू के बीच मतभेद गहराते हैं, तो आरजेडी इसे एक बड़े अवसर के रूप में देख सकती है. हालांकि, वर्तमान विधानसभा के गणित और विधायकों की संख्या को देखते हुए ऐसा होता हुआ फिलहाल संभव नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि बीजेपी भी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है.
इसके अलावा, यूसीसी जैसे किसी बड़े कानून को राज्य में रातों-रात लागू करना या इस पर केवल बयानों के आधार पर बड़ा राजनीतिक उलटफेर होना इतना आसान नहीं है, जिसके लिए लंबी प्रक्रिया की आवश्यकता होती है. इन तमाम कयासों के बीच यह तो साफ है कि आरजेडी के बयानों से राजनीतिक माहौल जरूर गर्म हो गया है, लेकिन जेडीयू के तेवरों से यह स्पष्ट है कि फिलहाल एनडीए गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है.
यहां देखें वीडियो
नीतीश कुमार को RJD के साथ आने का ऑफर, JDU ने दिया दो टूक जवाब
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