बिहार की राजनीति में इस वक्त यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और राजनीतिक समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है. क्या बिहार में बिना नीतीश कुमार के बीजेपी सरकार चला पाएगी? क्या यूसीसी के मुद्दे पर जेडीयू और बीजेपी के बीच बात बिगड़ चुकी है? इन तमाम सवालों के बीच राजनीतिक गलियारों में नंबर गेम और संभावित सियासी उठापटक को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. ऐसे में आइए विस्तार से समझते है कि UCC को लेकर क्यों मचा है घमासान और क्या कहता है नंबर गेम.
ADVERTISEMENT
यूसीसी और जेडीयू-बीजेपी के बीच तकरार
बिहार की राजनीति में फिलहाल यूसीसी को लेकर जेडीयू और बीजेपी के बीच तकरार साफ दिखाई दे रही है. हालांकि, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात तय मानी जा रही है और उन्होंने समय भी मांगा है, जिसके बाद पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट होगा. इस बीच, आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र द्वारा नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने का ऑफर दिए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि यदि जेडीयू अलग होती है, तो क्या सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार सुरक्षित रह पाएगी?
क्या कहते हैं एनडीए और जेडीयू के आंकड़े?
बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो यदि सीधे एनडीए से जेडीयू को अलग कर दिया जाए, तो समीकरण बीजेपी के पक्ष में पूरी तरह मजबूत नहीं दिखते. 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 122 है. यदि बीजेपी (88), एलजेपीआर (19), हम (5) और आरएलएम (4) के विधायकों को मिला लिया जाए, तो यह कुल योग 116 बैठता है, जो कि बहुमत के आंकड़े से नीचे है. वहीं, अगर जेडीयू महागठबंधन के साथ जुड़ती है, तो जेडीयू (85), आरजेडी (25), कांग्रेस (6), AIMIM(5), लेफ्ट(3), BSP(1) और IIP(1) को मिलाकर यह आंकड़ा 126 पहुंचता है, जो कि आसानी से बहुमत को पार कर जाता है.
नंबर गेम और संभावित जोड़-तोड़ की चर्चाएं
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जेडीयू अलग भी हो जाती है, तो भी सम्राट सरकार के लिए मुश्किलें उतनी बड़ी नहीं होंगी जितनी अनुमान लगाई जा रही हैं. इसके पीछे मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि कांग्रेस के पास 6 विधायक हैं और ऐसी चर्चाएं अक्सर चलती हैं कि कांग्रेस या आरजेडी के कुछ विधायक टूटकर बीजेपी के पाले में आ सकते हैं. इसके अलावा, अन्य छोटे दलों या निर्दलियों को लेकर भी यह कयास लगाए जाते रहे हैं कि संकट के समय बीजेपी बहुमत का आंकड़ा जुटाने में सफल हो सकती है.
जेडीयू का आधिकारिक रुख और आगे की रणनीति
जेडीयू ने यूसीसी के मुद्दे पर अभी तक संयम बरता है. उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि जब तक यूसीसी बिल का प्रारूप और उसके प्रावधान सार्वजनिक नहीं होते, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. पार्टी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा करेगी और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल, देखना यह होगा कि यूसीसी के इस सियासी पिच पर आगे क्या नए समीकरण बनते हैं.
'नीतीश जी छोड़ दें NDA का साथ और RJD के साथ बनाएं सरकार' भाई वीरेंद्र ने दिया ऑफर!
ADVERTISEMENT


