बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए NDA के नौ उम्मीदवारों और महागठबंधन की तरफ से सुनील सिंह के नामांकन के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच RLM के कोटे से मंत्री बने दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं. जब एनडीए की तरफ से नौ उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल कर दिया और उसमें दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं था, तो यह सवाल उठने लगा कि क्या अब उनकी मंत्री की कुर्सी चली जाएगी और क्या आरएलएम एनडीए गठबंधन से अलग हो जाएगी. इन तमाम कयासों और राजनीतिक सवालों के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने खुद मीडिया के सामने आकर स्थिति साफ की है.
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दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर क्या बोले उपेंद्र कुशवाहा
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने और उनके इस्तीफे की अटकलों को लेकर जब उपेंद्र कुशवाहा से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एनडीए के नेताओं ने मिलकर उन्हें मंत्री बनाया है. एनडीए ने जब तक के लिए मौका दिया है, तब तक दीपक प्रकाश अपने पद पर बने रहेंगे. इसके साथ ही कुशवाहा ने एनडीए के उन तमाम नौ उम्मीदवारों को अपनी ओर से जीत की अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई भी दी, जिन्होंने हाल ही में अपना नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने भरोसा जताया कि इन सभी उम्मीदवारों की जीत पूरी तरह से तय है और वे निर्विरोध चुन लिए जाएंगे.
NDA से अलग होने की चर्चाओं को बताया फालतू
आरएलएम को एमएलसी चुनाव में सीट न मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि पार्टी एनडीए गठबंधन से अलग हो सकती है और उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं. इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह से फालतू हैं और नाराजगी का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. जब उनसे पूछा गया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की तरफ से एक एमएलसी सीट देने की बात कही गई थी लेकिन इस बार नहीं मिली, तो उन्होंने कहा कि यह सवाल आपको उन लोगों से पूछना चाहिए जिन्होंने चिट्ठी जारी की थी. उन्होंने साफ किया कि गठबंधन के भीतर बातचीत हमेशा होती रहती है और एनडीए से अलग होने की बातें महज अफवाह हैं.
आरएलएम कोटे से नया मंत्री कौन? विधायक और प्रदेश अध्यक्ष का जवाब
दीपक प्रकाश की संभावित विदाई के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के कोटे से अगला मंत्री कौन बनेगा. इस विषय पर जब पार्टी के विधायक और प्रदेश अध्यक्ष से बात की गई, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मंत्री पद को लेकर कोई भी अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए का शीर्ष नेतृत्व ही तय करेगा. उन्होंने मजबूती से दोहराया कि वे लोग एनडीए गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं, साथ रहेंगे और अपनी हिस्सेदारी निश्चित तौर पर लेंगे. विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर कोई नाराजगी नहीं है और यदि दीपक प्रकाश के हटने की नौबत आती है, तो चार विधायकों में से किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे.
दीपक प्रकाश की कुर्सी पर क्यों मंडरा रहा है संकट
बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में दीपक प्रकाश सबसे बड़े संकट में दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि वे महज चार-साढ़े चार महीने तक ही मंत्री पद पर रह पाए और उन्होंने इस दौरान दो अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया. नियमों के मुताबिक, बिहार में कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य रहे केवल 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है. हालांकि, इसे लेकर एक याचिका भी दायर की गई है जिस पर सुनवाई होनी बाकी है. दिलचस्प बात यह है कि दीपक प्रकाश ने एक अनोखा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है, जहां वे बिना किसी सदन के सदस्य रहे दो बार मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, लेकिन अब एमएलसी टिकट न मिलने से उनका मंत्री पद जाना लगभग तय माना जा रहा है.
एमएलसी चुनाव के बड़े चेहरे
इस बार बिहार विधान परिषद के चुनाव में कई बड़े और दिग्गज चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. एनडीए के प्रमुख उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत, मशहूर पावर स्टार पवन सिंह और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता संजय मयूख शामिल हैं, जिन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ, विपक्षी महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने सुनील सिंह को एक बार फिर से अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है.
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