एक तरफ CM Samrat का विद्यार्थी सहयोग शिविर, दूसरी तरफ सड़कों पर छात्र आंदोलन

इन्द्र मोहन

• 04:42 PM • 25 Aug 2026

Bihar Student Protest: एक तरफ CM Samrat ने विद्यार्थी सहयोग शिविर की शुरुआत कर छात्रों से संवाद किया, दूसरी तरफ Patna में BPSC और TRE-4 अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है. जानिए छात्रों की प्रमुख मांगें और सरकार की पहल.

Patna Student Protest
एक तरफ ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’, दूसरी तरफ आंदोलन
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पटना में छात्रों का आंदोलन जारी है और इसी बीच बिहार में छात्र हित से जुड़ी एक नई सरकारी पहल की शुरुआत हुई है. एक तरफ वैशाली स्थित बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ का शुभारंभ किया और छात्रों से सीधे संवाद किया, तो दूसरी तरफ पटना की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगाते नजर आए. एक ही दिन सामने आईं ये दोनों तस्वीरें बिहार में छात्रों से जुड़े मुद्दों और सरकार के बीच बने संवाद की अलग-अलग तस्वीर पेश करती हैं.

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CM Samrat ने छात्रों से किया संवाद

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में आयोजित विद्यार्थी सहयोग शिविर का जायजा लिया और वहां मौजूद विद्यार्थियों से बातचीत की. सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर तेजी से समाधान करना है. बिहार सरकार के अनुसार, अब हर महीने के चौथे मंगलवार को विद्यार्थी सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे. इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों और छात्रावासों में अधिकारी विद्यार्थियों से सीधे बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे.

शिकायतों के समाधान के लिए समयसीमा तय

छात्रों की शैक्षणिक सुविधाओं, हॉस्टल और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए 30 दिनों की समयसीमा तय की गई है. छात्र ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थी सहयोग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. इसके अलावा किसी जानकारी या शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1100 पर संपर्क करने की सुविधा भी दी गई है. सरकार के मुताबिक शिकायत करने वाले छात्र-छात्राओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

दूसरी तरफ पटना की सड़कों पर छात्रों का प्रदर्शन

सरकार की इस पहल के बीच पटना में छात्र अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. गर्दनीबाग से लेकर राजधानी के कई इलाकों में आंदोलन का असर देखने को मिला. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. आंदोलन कर रहे छात्र खास तौर पर TRE-4 परीक्षा को दो चरणों के बजाय एकल परीक्षा के रूप में कराने और निगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही छात्रों की मांगों में 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने, दरोगा और सिपाही भर्ती सहित BSSC इंटर और स्नातक स्तरीय परीक्षाओं तथा AEDO जैसी लंबित परीक्षाओं की प्रक्रिया जल्द शुरू करना भी शामिल है.

परीक्षा कैलेंडर और 90 फीसदी डोमिसाइल की मांग

प्रदर्शनकारी छात्र सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नियमित और समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी करने की भी मांग कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में देरी से अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और उनकी तैयारी भी प्रभावित होती है. इसके अलावा बिहार में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के लिए 90 फीसदी डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है.

‘जंतर-मंतर पार्ट 3’ की चर्चा क्यों?

बिहार में छात्र आंदोलनों के बीच अब पटना के प्रदर्शन को लेकर ‘जंतर-मंतर पार्ट 3’ जैसी चर्चा भी हो रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की बाकी मांगों पर किस तरह आगे बढ़ती है. एक तरफ सरकार विद्यार्थी सहयोग शिविर के जरिए छात्रों की समस्याओं को सीधे सुनने और समयबद्ध तरीके से समाधान करने की व्यवस्था शुरू कर रही है, तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्र परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े बड़े फैसलों की मांग को लेकर सड़क पर हैं. अब देखना अहम होगा कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद का यह नया मॉडल आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मांगों तक कितना पहुंचता है. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की ओर से जिन मुद्दों पर पहल की गई है, क्या उससे छात्रों का आंदोलन समाप्त होता है या प्रदर्शन आगे भी जारी रहता है.