बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE 4.0) के नोटिफिकेशन और परीक्षा पैटर्न को लेकर चल रहा विवाद अब गरमाता जा रहा है. हाल ही में अपनी मांगों को लेकर पटना की सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और परीक्षा के बदलते नियमों को लेकर देश के जाने-माने शिक्षक खान सर (Khan Sir) ने सरकार और अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है. Bihar Tak से खास बातचीत में खान सर ने छात्रों का दर्द बयां करते हुए सिस्टम की खामियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं.
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'IAS जैसा पैटर्न तो वैसी ही सैलरी और पावर भी दो'
खान सर ने बीपीएससी (BPSC) द्वारा शिक्षक भर्ती परीक्षा में अचानक बदलाव (जैसे प्री और मेंस लागू करने की चर्चाओं) पर गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा, "जब सरकार ने TRE 1, TRE 2 और TRE 3 की परीक्षाएं एक ही पुराने पैटर्न पर लीं तो फिर TRE 4.0 के लिए अचानक नियम क्यों बदले जा रहे हैं? किसी अधिकारी ने सरकार को समझा दिया कि मेंस (Mains) लेने से बहुत अच्छे शिक्षक मिल जाएंगे। अगर ऐसा है, तो जिन अधिकारियों ने यह नियम बनाया है, उनसे कहिए कि वे आकर स्कूल में पढ़ाएं, देखते हैं कितना अच्छा पढ़ाते हैं! शिक्षण (Teaching) एक अलग कला है."
उन्होंने आगे कहा कि यदि आप आईएएस (IAS) के स्तर की परीक्षा लेना चाहते हैं, तो शिक्षकों को आईएएस जैसी सैलरी, वैसी ही सुविधाएं और पावर भी दीजिए, सिर्फ परीक्षा को कठिन बना देने से बुनियादी ढांचा नहीं सुधरेगा.
छात्रों पर लाठीचार्ज की खान सर ने की कड़े शब्दों में निंदा
पटना की सड़कों पर टीआरई 4 के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर खान सर बेहद आहत दिखे. उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों और नौकरी के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे. सरकार उन्हें अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दे रही है और इस तरह बर्बरता से पीटा जा रहा है कि कई छात्र अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं. किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है.
'आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक हैं पेपर लीक करने वाले'
देश और बिहार में लगातार हो रहे पेपर लीक (जैसे NEET और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाएं) के मुद्दों पर खान सर ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा, "दो कौड़ी के लोग आते हैं और पेपर लीक करके छात्रों की मेहनत से खेल जाते हैं. ये लोग आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक हैं. आतंकवादी सीमित लोगों को मारता है, लेकिन ये लोग लाखों-करोड़ों युवाओं का भविष्य और पूरा जीवन एक झटके में बर्बाद कर देते हैं. जो गधे अयोग्य हैं, वे पेपर खरीदकर डॉक्टर और न्यूरो या कार्डियोलॉजिस्ट बन जाएंगे तो वे तो मरीजों को मार ही डालेंगे. इस पूरे नेक्सेस में शामिल बड़े चेहरों को पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोचिंग सेंटर्स की जांच होनी है, तो वे अपनी संस्था से ही शुरुआत करने की खुली चुनौती देते हैं.
'दोबारा परीक्षा दे दो' कहने वाले बदतमीज हैं
अक्सर पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द होने पर 'दोबारा परीक्षा देने में क्या जाता है' जैसी टिप्पणियों पर खान सर ने करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि ऐसी बातें सिर्फ वही कह सकते हैं जिसने कभी खुद किसी कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी नहीं की. बोर्ड एग्जाम और कॉम्पिटिटिव एग्जाम में बहुत अंतर होता है.
खान सर ने भावुक होते हुए कहा, "अधिकारियों को एसी कमरों में बैठकर यह अंदाजा नहीं होता कि एक गरीब छात्र और उसके बूढ़े पिता पर क्या गुजरती है, जिसने अपनी जमीन गिरवी रखकर बच्चों को पढ़ाया है. देश के 80 फीसदी छात्र एक वक्त खाना बनाते हैं तो दूसरे वक्त के लिए बचाकर रखते हैं. छात्राओं को दोबारा तैयारी का मौका नहीं मिलता, उनके माता-पिता उनकी शादी कर देते हैं. कॉम्पिटिशन में मानवीय भूल (Human Error) की वजह से एक ओएमआर (OMR) का गोला गलत भरने पर पूरी जिंदगी दांव पर लग जाती है. ऐसे में दोबारा परीक्षा का दबाव डालना छात्रों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.
सरकार जल्द जारी करे स्पष्ट नोटिफिकेशन
बातचीत के अंत में खान सर ने बिहार सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए बिना किसी असमंजस के जल्द से जल्द पुराना पैटर्न बहाल रखते हुए स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाए, ताकि सड़कों पर खा रहे युवाओं को उनका हक मिल सके और वे मानसिक तनाव और अवसाद (Depression) से बच सकें.
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